Indira Ekadashi 2026: इंद्रा एकादशी की शाम कहां-कहां करें दीपदान? पितृ पक्ष में जलाए गए इन दीयों का होता है विशेष महत्व
आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली इंदिरा एकादशी भगवान विष्णु की आराधना और पितरों के मोक्ष की कामना के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजा के साथ शाम के समय दीपदान करने का भी विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि गोधूलि बेला में किया गया दीपदान पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और घर में सुख-शांति की कामना के लिए किया जाता है।इंदिरा एकादशी की शाम सूर्यास्त के बाद दीप जलाने की परंपरा कई परिवारों में निभाई जाती है। हालांकि, अलग-अलग परंपराओं और क्षेत्रों में दीपदान की विधि अलग हो सकती है।
पीपल के पेड़ के नीचे करें दीपदान
धार्मिक मान्यताओं में पीपल के वृक्ष का संबंध देवताओं और पितरों से जोड़ा जाता है। इंदिरा एकादशी की शाम सूर्यास्त के बाद पीपल के पेड़ के पास दीपक जलाने की परंपरा है।
इसके लिए मिट्टी के दीपक में तिल या सरसों का तेल डालकर दीपक जलाया जाता है। दीपदान करते समय अपने पितरों का स्मरण कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना की जाती है। मान्यता है कि इससे पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट होती है।
तुलसी के पास जलाएं घी का दीपक
इंदिरा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का विशेष महत्व माना जाता है। शाम के समय तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाकर भगवान विष्णु का स्मरण किया जा सकता है।
दीपक जलाते समय 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, तुलसी के पास दीप जलाने से घर में सकारात्मकता और सुख-समृद्धि का वातावरण बना रहता है।
ध्यान रखें कि अलग-अलग परंपराओं में तुलसी की पूजा के नियम अलग हो सकते हैं। कई घरों में शाम के बाद तुलसी को छूने या जल चढ़ाने से परहेज किया जाता है।
घर की चौखट पर भी जलाएं दीपक
इंदिरा एकादशी की शाम घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने की भी परंपरा है। मान्यता के अनुसार, मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का स्वागत होता है।इसके अलावा कुछ परंपराओं में घर की दक्षिण दिशा में भी दीपक जलाकर यम और पितरों का स्मरण किया जाता है। दक्षिण दिशा को पितरों से संबंधित माना जाता है, इसलिए यहां दीपदान का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है।
दीपदान का क्या है सही समय?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपदान के लिए सूर्यास्त के बाद गोधूलि या प्रदोष काल को शुभ माना जाता है। हालांकि, किसी विशेष शहर में सूर्यास्त का समय अलग हो सकता है। इसलिए दीपदान के लिए अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार सूर्यास्त का समय देखना बेहतर रहता है।इंदिरा एकादशी पर दीपदान करते समय सबसे महत्वपूर्ण बात श्रद्धा और मन की भावना मानी जाती है। पीपल, तुलसी, घर की चौखट या दक्षिण दिशा में दीप जलाते समय पितरों का स्मरण करें और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।

