कूर्म जयंती पर भगवान विष्णु के कच्छप अवतार की पूजा कैसे करें, जानिए विधि और महत्व
कूर्म जयंती भगवान विष्णु के कच्छप (कछुआ) अवतार के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी अवतार में भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन के समय मंदराचल पर्वत को अपनी पीठ पर धारण कर सृष्टि की रक्षा की थी। इस दिन पूजा-अर्चना करने से सुख-समृद्धि, स्थिरता और जीवन में संतुलन का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
कूर्म जयंती की पूजा विधि
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर या मंदिर में पूजा स्थल को साफ करके भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। संभव हो तो कछुए के प्रतीक या कूर्म अवतार की तस्वीर भी रखें।
इसके बाद दीपक जलाएं और भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी दल, चंदन और पीले वस्त्र अर्पित करें। कूर्म अवतार की कथा का पाठ करें और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें।
भगवान को पंचामृत, फल और मिठाई का भोग लगाएं। इसके बाद विष्णु सहस्रनाम या कूर्म अवतार स्तुति का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
महत्व
धार्मिक मान्यता है कि कूर्म जयंती पर विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और व्यक्ति को स्थिरता, धन और सफलता की प्राप्ति होती है। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए शुभ माना जाता है जो जीवन में स्थायित्व और प्रगति चाहते हैं।

