धनतेरस का त्योहार सिर्फ सोना-चांदी और नए बर्तन खरीदने तक सीमित नहीं है। इस दिन यमराज के नाम से दीपक जलाने की भी विशेष परंपरा है। इसे यम दीपदान या यम का दीपक कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि धनतेरस की शाम यमराज के निमित्त दीपदान करने से परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है। इस साल धनतेरस 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। आइए जानते हैं यम का दीपक जलाने का सही समय, दिशा और पूरी विधि।
यम का दीपक कब जलाना चाहिए?
धनतेरस के दिन शाम को सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में यम दीपदान करना शुभ माना जाता है। इस साल 6 नवंबर को यम दीपदान के लिए शाम का समय विशेष रहेगा।
जयपुर में प्रदोष काल शाम लगभग 5:41 बजे से रात 8:17 बजे तक रहेगा। इसी दौरान यमराज के नाम से दीपक जलाकर परिवार की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना कर सकते हैं।
यम का दीपक किस दिशा में जलाएं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना जाता है। इसलिए यम का दीपक घर के मुख्य दरवाजे के बाहर दक्षिण दिशा की ओर जलाना चाहिए।
दीपक रखते समय ध्यान रखें कि उसकी लौ दक्षिण दिशा की ओर रहे। इसे मुख्य द्वार के बाहर किसी सुरक्षित स्थान पर रखें, ताकि दीपक आसानी से जलता रहे।
कैसे जलाएं यम का दीपक? जानें आसान विधि
यम दीपदान के लिए मिट्टी या आटे का चौमुखा दीपक इस्तेमाल किया जाता है। इसकी पूजा करने की विधि इस प्रकार है।
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सबसे पहले आटे या मिट्टी का चौमुखा दीपक लें।
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इसमें रुई की चार नई बत्तियां लगाएं।
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दीपक में सरसों या तिल का तेल भरें।
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दीपक के नीचे थोड़े साबुत चावल यानी अक्षत रखें।
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शाम को सूर्यास्त के बाद दीपक जलाएं।
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इसे घर के मुख्य दरवाजे के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखें।
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हाथ जोड़कर यमराज का स्मरण करें और परिवार की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुरक्षा की प्रार्थना करें।
कुछ परिवारों में घर के सबसे बड़े सदस्य द्वारा यम दीपक जलाने की परंपरा भी है। अलग-अलग क्षेत्रों में इसकी विधि में थोड़ा अंतर हो सकता है।
यम दीपदान करते समय बोलें यह मंत्र
यमराज के नाम से दीपक जलाते समय इस पारंपरिक मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।
मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन च मया सह।
त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम॥
इस मंत्र के माध्यम से सूर्यपुत्र यमराज से परिवार की रक्षा और मंगल की कामना की जाती है।
धनतेरस पर इन जगहों पर भी कर सकते हैं दीपदान
यम दीपक के अलावा धनतेरस पर कई अन्य स्थानों पर भी दीपदान करने की परंपरा है।
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तुलसी के पास: तुलसी के पौधे के नजदीक दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
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पीपल के पेड़ के नीचे: धार्मिक मान्यता के अनुसार यहां दीपदान करने से पुण्य मिलता है।
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मंदिर में: मंदिर में दीपक जलाकर देवी-देवताओं का स्मरण कर सकते हैं।
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आंवले और केले के पेड़ के पास: कुछ परंपराओं में इन पेड़ों के नीचे दीपदान किया जाता है।
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नदी या तालाब के किनारे: जलाशयों के पास भी दीपदान की परंपरा है। हालांकि, जल में दीपक या अन्य सामग्री डालने के बजाय सुरक्षित किनारे पर दीपक जलाएं।
क्या है यम दीपदान का धार्मिक महत्व?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यमराज मृत्यु के देवता और धर्म के अनुसार न्याय करने वाले देवता हैं। धनतेरस के दिन उनके नाम से दीपदान करने की परंपरा अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति और परिवार की सुरक्षा की कामना से जुड़ी है।
मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक यम दीपदान करने से यमराज प्रसन्न होते हैं और परिवार के सदस्यों को लंबी आयु का आशीर्वाद देते हैं। यही वजह है कि धनतेरस की शाम घर के बाहर यमराज के नाम का दीपक जलाया जाता है।

