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शनि जयंती पर पीपल के पेड़ की कितनी परिक्रमा मानी जाती है शुभ? जानिए धार्मिक महत्व और 2 बड़े संकटों से राहत का विश्वास

शनि जयंती पर पीपल के पेड़ की कितनी परिक्रमा मानी जाती है शुभ? जानिए धार्मिक महत्व और 2 बड़े संकटों से राहत का विश्वास

हिंदू धर्म में शनि जयंती का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन न्याय के देवता शनि देव के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर भक्त विशेष पूजा-अर्चना, व्रत और दान-पुण्य करते हैं। मान्यता है कि इस दिन किए गए धार्मिक उपाय जीवन की कठिनाइयों को कम करने में सहायक होते हैं।

शनि जयंती के अवसर पर पीपल के पेड़ की पूजा और परिक्रमा का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पीपल वृक्ष में देवताओं का वास माना जाता है और इसे शनि देव से भी विशेष रूप से जोड़ा जाता है।

🌳 पीपल के पेड़ की कितनी परिक्रमा शुभ मानी जाती है?

धार्मिक परंपराओं के अनुसार शनि जयंती के दिन पीपल के पेड़ की 7 या 11 परिक्रमा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। कुछ श्रद्धालु अपनी आस्था और संकल्प के अनुसार 21 परिक्रमा भी करते हैं।

मान्यता है कि परिक्रमा करते समय “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करने से विशेष फल प्राप्त होता है और शनि दोष का प्रभाव कम होता है।

⚖️ धार्मिक महत्व क्या है?

शास्त्रों और लोक मान्यताओं के अनुसार पीपल का वृक्ष त्रिदेवों का प्रतीक माना गया है। शनि जयंती के दिन इसकी पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में अनुशासन, धैर्य और स्थिरता आती है।

मान्यता यह भी है कि पीपल की परिक्रमा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और व्यक्ति के कर्मों का संतुलन बेहतर होता है, जिससे जीवन की बाधाएं धीरे-धीरे कम होने लगती हैं।

🪔 किन 2 बड़े संकटों से मिलती है राहत?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि जयंती पर पीपल की परिक्रमा करने से मुख्य रूप से दो प्रकार के कष्टों से राहत मिलने का विश्वास है:

1️⃣ शनि दोष और साढ़ेसाती का प्रभाव

जिन लोगों की कुंडली में शनि दोष या साढ़ेसाती का प्रभाव होता है, उनके जीवन में संघर्ष, देरी और बाधाएं बढ़ सकती हैं। माना जाता है कि पीपल की परिक्रमा और शनि देव की पूजा से इन प्रभावों में कमी आती है।

2️⃣ आर्थिक और कार्य बाधाएं

दूसरा प्रमुख संकट जीवन में आर्थिक रुकावट और कार्यों में लगातार रुकावट का माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि शनि जयंती पर की गई पूजा से रुके हुए कार्यों में गति आती है और आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत मिलते हैं।

🙏 पूजा विधि का सरल स्वरूप

भक्त इस दिन सुबह स्नान करके व्रत रखते हैं और पीपल के वृक्ष के पास जाकर जल अर्पित करते हैं। इसके बाद दीप जलाकर परिक्रमा करते हुए शनि मंत्र का जाप किया जाता है। कई लोग तेल का दीपक भी जलाते हैं और काले तिल का दान करते हैं।

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