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पवित्र शिवरात्रि व्रत कथा: सुपरफास्ट शिवरात्रि व्रत कथा, जानें महादेव की महिमा

पवित्र शिवरात्रि व्रत कथा: सुपरफास्ट शिवरात्रि व्रत कथा, जानें महादेव की महिमा

महाशिवरात्रि व्रत कथा भगवान शिव की महिमा और भक्ति से जुड़ी एक प्रसिद्ध धार्मिक कथा है। मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से भगवान भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

शिवरात्रि व्रत कथा

बहुत समय पहले एक शिकारी था, जिसका नाम चित्रभानु था। वह जंगल में शिकार करके अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। एक दिन महाशिवरात्रि के दिन वह शिकार करने के लिए जंगल गया, लेकिन पूरे दिन उसे कोई शिकार नहीं मिला।शाम होने पर वह भूखा-प्यासा एक बेल के पेड़ पर चढ़ गया और रात बिताने लगा। उस पेड़ के नीचे एक शिवलिंग स्थापित था, जिसे वह देख नहीं पाया था। रात के समय उसकी आंखों से नींद आने लगी, तो वह बेल के पत्ते तोड़कर नीचे गिराने लगा।

अनजाने में गिराए गए वे बेलपत्र शिवलिंग पर चढ़ गए। उस दिन उसने भोजन भी नहीं किया था, इसलिए उसका व्रत भी हो गया और रातभर जागरण भी हुआ।रात के अलग-अलग पहरों में जब वह पेड़ से पत्ते तोड़कर नीचे गिराता रहा, तब भगवान शिव की पूजा पूरी होती गई। सुबह होने पर जब शिकारी अपने घर लौटने लगा, तभी भगवान शिव उसके सामने प्रकट हुए।भगवान शिव ने उसकी अनजाने में हुई पूजा और व्रत से प्रसन्न होकर उसे आशीर्वाद दिया। शिवजी की कृपा से उसके जीवन के सभी कष्ट दूर हो गए और उसे सुख-समृद्धि प्राप्त हुई।

शिवरात्रि व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं, शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और पुष्प अर्पित करते हैं तथा भगवान शिव का ध्यान करते हैं।कहा जाता है कि शिवरात्रि की रात चार पहर पूजा करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। भक्त महामृत्युंजय मंत्र, शिव चालीसा और शिव मं का जाप करते हैं।

ॐ नमः शिवाय।
हर हर महादेव। 🔱

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