Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज की पूजा में क्यों बांधा जाता है फुलेरा? जानें शिव-पार्वती से जुड़ा खास महत्व
हरतालिका तीज हिंदू धर्म के प्रमुख व्रतों में से एक है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। हरतालिका तीज की पूजा में कई तरह की धार्मिक परंपराएं निभाई जाती हैं, जिनमें फुलेरा बांधने की परंपरा बेहद खास मानी जाती है। मान्यता है कि फुलेरा के बिना हरतालिका तीज की पूजा अधूरी मानी जाती है।
क्या होता है फुलेरा?
फुलेरा फूलों और पत्तियों से तैयार किया गया एक तरह का सुंदर मंडप होता है। इसे भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या शिवलिंग के ऊपर सजाया जाता है। कई परंपराओं में फुलेरा को पांच फूलों की मालाओं से तैयार किया जाता है।
मान्यता के अनुसार फुलेरा की पांच मालाएं भगवान शिव की पांच पुत्रियों का प्रतीक मानी जाती हैं। इनके नाम जया, विषहरा, शामिलबारी, देव और दोतली बताए गए हैं।
शिव-पार्वती की पूजा में क्यों महत्वपूर्ण है फुलेरा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार फूलों को पवित्रता, सौंदर्य और प्रकृति का प्रतीक माना जाता है। हरतालिका तीज में फुलेरा बनाकर उसे शिव-पार्वती के ऊपर बांधने की परंपरा माता पार्वती की भगवान शिव के प्रति भक्ति और समर्पण से भी जोड़ी जाती है।
कहा जाता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी कारण हरतालिका तीज पर महिलाएं भी श्रद्धा और समर्पण के साथ शिव-पार्वती की पूजा करती हैं।
फुलेरा में किन चीजों का इस्तेमाल होता है?
फुलेरा को अलग-अलग क्षेत्रों की परंपराओं के अनुसार फूलों और पत्तियों से तैयार किया जाता है। कई जगह इसमें अशोक के पत्ते, केले के पत्ते और बांस जैसी सामग्री का भी प्रयोग किया जाता है। इनके साथ विभिन्न रंगों और सुगंध वाले फूल लगाए जाते हैं।
इसका उद्देश्य केवल पूजा स्थल को सजाना नहीं, बल्कि प्रकृति और शिव-पार्वती के प्रति श्रद्धा प्रकट करना भी माना जाता है।
फुलेरा बांधने से क्या फल मिलता है?
धार्मिक मान्यता है कि हरतालिका तीज पर विधि-विधान से फुलेरा बांधकर शिव-पार्वती की पूजा करने से माता पार्वती प्रसन्न होती हैं और व्रती को सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद मिलता है। विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से यह व्रत करती हैं।
हालांकि, फुलेरा से जुड़े शुभ फल और धार्मिक लाभ पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं, इन्हें वैज्ञानिक तथ्य नहीं माना जाता।

