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Hariyali Teej Vrat Rules: हरियाली तीज व्रत में रखें इन नियमों का ध्यान, जानें पूजा और व्रत से जुड़ी जरूरी बातें

Hariyali Teej Vrat Rules: हरियाली तीज व्रत में रखें इन नियमों का ध्यान, जानें पूजा और व्रत से जुड़ी जरूरी बातें

हरियाली तीज का पर्व हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और पति की लंबी उम्र की कामना पूरी होती है।

हरियाली तीज के दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं, सोलह श्रृंगार करती हैं और माता पार्वती से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मांगती हैं। इस व्रत को करते समय कुछ विशेष नियमों का पालन करने की परंपरा है।

1. व्रत से पहले संकल्प लें

हरियाली तीज व्रत शुरू करने से पहले सुबह स्नान करके पूजा स्थान की सफाई करें और भगवान शिव-माता पार्वती का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। मान्यता है कि संकल्प के साथ किया गया व्रत अधिक फलदायी होता है।

2. सोलह श्रृंगार का महत्व

हरियाली तीज पर सुहागिन महिलाओं के लिए सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व बताया गया है। महिलाएं मेहंदी लगाती हैं, चूड़ियां पहनती हैं और नए वस्त्र धारण करती हैं। इसे सौभाग्य और शुभता का प्रतीक माना जाता है।

3. निर्जला व्रत रखने की परंपरा

कई महिलाएं हरियाली तीज पर निर्जला व्रत रखती हैं, यानी पूरे दिन बिना अन्न और जल ग्रहण किए व्रत करती हैं। हालांकि, स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखने की सलाह दी जाती है।

4. शिव-पार्वती की पूजा करें

इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करना शुभ माना जाता है। पूजा में फूल, फल, अक्षत, धूप, दीप और श्रृंगार की सामग्री अर्पित करने की परंपरा है। माता पार्वती को सुहाग की सामग्री चढ़ाने का भी महत्व बताया गया है।

5. व्रत के दौरान रखें संयम

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत के दौरान मन को शांत रखना चाहिए। क्रोध, नकारात्मक विचार और विवाद से बचने की सलाह दी जाती है। भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए भक्ति भाव बनाए रखना शुभ माना जाता है।

6. कथा सुनने का महत्व

हरियाली तीज व्रत में माता पार्वती और भगवान शिव से जुड़ी व्रत कथा सुनने की परंपरा है। मान्यता है कि कथा सुनने से व्रत का महत्व बढ़ता है और पुण्य फल प्राप्त होता है।

7. व्रत का पारण विधि से करें

व्रत समाप्त करने के बाद पूजा और आरती करने के बाद ही व्रत खोलने की परंपरा है। पारण के समय सात्विक भोजन ग्रहण करना शुभ माना जाता है।

हरियाली तीज का धार्मिक महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इसी कारण हरियाली तीज को पति-पत्नी के प्रेम और सौभाग्य से जुड़ा पर्व माना जाता है।

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