Hanuman Janmotsav 2026: प्रयागराज के बड़े हनुमान मंदिर में पांच दिन चलेगा उत्सव, 56 भोग और 1001 दीपों से होगी महाआरती
दीपावली से पहले संगम नगरी प्रयागराज में भक्ति और आस्था का विशेष माहौल बनने जा रहा है। यहां स्थित प्रसिद्ध श्री बड़े हनुमान मंदिर में पांच दिवसीय हनुमत जन्मोत्सव की शुरुआत वैदिक अनुष्ठानों के साथ हो चुकी है। इस दौरान मंदिर में विशेष पूजा-पाठ, हवन, रामायण पाठ और भव्य आरती का आयोजन किया जाएगा। मुख्य पर्व पर बजरंगबली को 56 भोग अर्पित किए जाएंगे और 1001 दीपों से महाआरती होगी।
बाघंबरी गद्दी के पीठाधीश्वर और मंदिर के महंत बलबीर गिरि के सानिध्य में उत्सव का शुभारंभ सप्त शुद्धि, अथर्वशीर्ष महागणपति पाठ और अष्टद्रव्य हवन से हुआ। आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है।
छोटी दिवाली पर क्यों मनाया जाता है हनुमान जन्मोत्सव?
देश के ज्यादातर हिस्सों में हनुमान जयंती चैत्र पूर्णिमा को मनाई जाती है, लेकिन प्रयागराज के बड़े हनुमान मंदिर में कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी यानी नरक चतुर्दशी के दिन जन्मोत्सव मनाने की परंपरा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी का प्राकट्य इसी तिथि को स्वाति नक्षत्र में हुआ था। एक अन्य पौराणिक कथा के मुताबिक, लंका और पाताल लोक में राक्षसों का संहार करने के बाद हनुमान जी त्रिवेणी तट पर विश्राम करने पहुंचे थे। मान्यता है कि माता सीता ने उन्हें आरोग्य और अमरत्व का आशीर्वाद देते हुए सिंदूर अर्पित किया था। मंदिर में हनुमान जी की विश्राम मुद्रा में स्थापित प्रतिमा इसी कथा से जुड़ी मानी जाती है।
पांच दिनों तक होंगे विशेष धार्मिक आयोजन
हनुमत जन्मोत्सव के दौरान अलग-अलग दिनों में कई अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे।
- पहला दिन: सप्त शुद्धि, अथर्वशीर्ष पाठ और अष्टद्रव्य हवन के साथ उत्सव का शुभारंभ।
- दूसरा और तीसरा दिन: राम तारक मंत्र हवन और अखंड रामायण पाठ।
- चौथा दिन: शाम 5 बजे से संगीतमय सुंदरकांड पाठ और हनुमान जी को विशेष सिंदूर चोला अर्पित किया जाएगा।
- पांचवां दिन: महाभिषेक, 56 व्यंजनों का महाभोग, 1001 दीपों से महाआरती और रात्रि जागरण होगा।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सुरक्षा व्यवस्था
पांच दिवसीय आयोजन में बड़ी संख्या में भक्तों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए मंदिर परिसर और संगम क्षेत्र में सुरक्षा के इंतजाम किए जा रहे हैं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, बैरिकेडिंग और प्रवेश-निकास के अलग-अलग रास्तों की व्यवस्था की गई है।
प्रयागराज का बड़ा हनुमान मंदिर अपनी विश्राम मुद्रा वाली प्रतिमा के लिए विशेष पहचान रखता है। छोटी दिवाली पर मनाए जाने वाले इस जन्मोत्सव के दौरान यहां देशभर से श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
डिस्क्लेमर: लेख में दी गई धार्मिक तिथियों और कथाओं से जुड़ी जानकारियां मान्यताओं पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।

