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नीलम की अंगूठी पहनने जा रहे हैं? पहले जान लें ये जरूरी बातें, गलत तरीके से धारण किया तो हो सकता है उलटा असर

नीलम की अंगूठी पहनने जा रहे हैं? पहले जान लें ये जरूरी बातें, गलत तरीके से धारण किया तो हो सकता है उलटा असर

रत्न शास्त्र और ज्योतिष में अलग-अलग ग्रहों से संबंधित रत्नों का विशेष महत्व बताया गया है। इन्हीं में नीलम रत्न को बेहद प्रभावशाली माना जाता है। मान्यता के अनुसार नीलम का संबंध शनिदेव से है और यह शनि के शुभ प्रभाव को मजबूत करने वाला रत्न माना जाता है। यही कारण है कि इसे धारण करने से पहले विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यदि कुंडली में शनि शुभ और मजबूत स्थिति में हो तो नीलम व्यक्ति के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। वहीं, अगर शनि प्रतिकूल स्थिति में हो तो बिना सलाह के नीलम पहनने से परेशानियां बढ़ने की मान्यता है। इसलिए केवल देखकर या किसी दूसरे व्यक्ति को देखकर नीलम धारण करना उचित नहीं माना जाता।

नीलम पहनने से क्या लाभ माने जाते हैं

ज्योतिष में नीलम को कर्म, अनुशासन, मेहनत, न्याय और जिम्मेदारी से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि कुंडली में अनुकूल शनि वाले जातक नीलम धारण करने से कार्यक्षेत्र में स्थिरता, आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता में सुधार महसूस कर सकते हैं।

कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं में नीलम को आर्थिक स्थिति मजबूत करने, करियर में प्रगति और रुके हुए कार्यों में गति देने वाला भी माना गया है। हालांकि ये सभी दावे धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।

किन लोगों को नीलम पहनने से बचना चाहिए

ज्योतिष के अनुसार हर व्यक्ति के लिए नीलम शुभ नहीं होता। जिन लोगों की कुंडली में शनि अशुभ स्थिति में हो या शनि से संबंधित प्रतिकूल योग बन रहे हों, उन्हें बिना कुंडली का विश्लेषण कराए यह रत्न धारण नहीं करना चाहिए।

इसके अलावा सूर्य, चंद्रमा या मंगल के साथ शनि की स्थिति को देखकर भी नीलम धारण करने का निर्णय लेने की सलाह दी जाती है। यही वजह है कि ज्योतिषी अक्सर नीलम पहनने से पहले जन्मकुंडली की पूरी जांच करने की सलाह देते हैं।

कैसे पहनें नीलम की अंगूठी

रत्न शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार नीलम को चांदी की अंगूठी में धारण करना शुभ माना जाता है। इसे शनिवार के दिन धारण करने की परंपरा है। अंगूठी को पहले शुद्ध जल या गंगाजल से साफ करके शनिदेव की पूजा करने के बाद धारण करने की मान्यता है।

नीलम को आमतौर पर मध्यमा उंगली में पहनने की सलाह दी जाती है। हालांकि अंगूठी की धातु, वजन और धारण करने का सही समय व्यक्ति की कुंडली के आधार पर अलग-अलग बताया जा सकता है।

नीलम खरीदते समय रखें सावधानी

नीलम खरीदते समय उसकी गुणवत्ता और प्रमाणिकता का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। बाजार में प्राकृतिक नीलम के अलावा कृत्रिम और सिंथेटिक रत्न भी उपलब्ध होते हैं। इसलिए महंगा रत्न खरीदने से पहले उसकी जांच और प्रमाणपत्र लेना बेहतर माना जाता है।

नीलम से जुड़े लाभ और नुकसान ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। इनका वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे धारण करने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी से कुंडली का विश्लेषण करवाना बेहतर रहेगा।

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