101 घरों में एक साथ गूंजा गायत्री मंत्र, यज्ञ के साथ परिवार निर्माण का लिया संकल्प
भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता माना जाता है। गणेश द्वादश नाम स्तोत्रम् में भगवान गणपति के 12 नामों का वर्णन मिलता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धा से इन नामों का पाठ करने से जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने और शुभ कार्यों में सफलता की कामना की जाती है।
॥ श्री गणेश द्वादश नाम स्तोत्रम् ॥
शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजम्।
प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये॥
अभीप्सितार्थसिद्ध्यर्थं पूजितो यः सुरासुरैः।
सर्वविघ्नहरस्तस्मै गणाधिपतये नमः॥
गणानामधिपश्चण्डो गजवक्त्रस्त्रिलोचनः।
प्रसन्न भव मे नित्यं वरदातर्विनायक॥
सुमुखश्चैकदन्तश्च कपिलो गजकर्णकः।
लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो विनायकः॥
धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजाननः।
द्वादशैतानि नामानि गणेशस्य यः पठेत्॥
विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी विपुलं धनम्।
इष्टकामं तु कामार्थी धर्मार्थी मोक्षमक्षयम्॥
विद्यारम्भे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथा।
संग्रामे संकटे चैव विघ्नस्तस्य न जायते॥
गणेश जी के 12 नाम
सुमुख, एकदंत, कपिल, गजकर्णक, लंबोदर, विकट, विघ्ननाश, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचंद्र और गजानन।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन नामों का पाठ विद्यारंभ, विवाह, गृह प्रवेश, यात्रा और संकट के समय किया जा सकता है। Webdunia के अनुसार इसे विशेष रूप से बुधवार या गुरुवार को पढ़ने की भी परंपरा बताई गई है।

