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Ganesh Visarjan 2026: अनंत चतुर्दशी पर ऐसे करें गणपति विसर्जन, मिट्टी का दोबारा कर सकते हैं इस्तेमाल
 

Ganesh Visarjan 2026: अनंत चतुर्दशी पर ऐसे करें गणपति विसर्जन, मिट्टी का दोबारा कर सकते हैं इस्तेमाल

25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के अवसर पर गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश प्रतिमा का विसर्जन दिन में किया जा सकता है, लेकिन शास्त्रीय नियमों में सूर्यास्त से पहले विसर्जन को उचित बताया गया है। अगर घर में मिट्टी की छोटी गणेश प्रतिमा स्थापित की गई है, तो उसका विसर्जन घर पर भी किया जा सकता है।
घर पर कैसे करें मिट्टी की प्रतिमा का विसर्जन?
घर में विसर्जन के लिए एक बड़े और साफ बर्तन में पानी भरें। पूजा-अर्चना पूरी करने के बाद गणेश प्रतिमा को इसमें रख दें और मिट्टी को धीरे-धीरे पानी में घुलने दें। प्रतिमा पूरी तरह मिट्टी में बदल जाने के बाद इस मिट्टी का इस्तेमाल पौधे लगाने या बागवानी में किया जा सकता है।
हालांकि, यह तरीका तभी अपनाना उचित है जब प्रतिमा पूरी तरह प्राकृतिक मिट्टी से बनी हो। अगर मूर्ति में POP, प्लास्टिक या केमिकल युक्त रंग इस्तेमाल हुए हैं, तो उसकी मिट्टी या पानी का दोबारा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
Ganesh Purana में भी मिलता है मिट्टी के गणेश का उल्लेख
गणेश पुराण में मिट्टी से गणेश प्रतिमा बनाकर उसकी पूजा करने और अनुष्ठान पूरा होने के बाद जल में विसर्जन करने का उल्लेख मिलता है। एक प्रसंग में पार्वती अपने पिता हिमालय से गणेश उपासना की विधि पूछती हैं। हिमालय उन्हें साफ, चिकनी और कंकड़ रहित मिट्टी से प्रतिमा बनाने की विधि बताते हैं।
मिट्टी से बनी इस प्रतिमा को पार्थिव गणेश कहा जाता है। पूजा और व्रत पूरा होने के बाद प्रतिमा को नदी या तालाब में विसर्जित करने तथा वाद्य यंत्रों के साथ वापस लौटने की परंपरा का भी वर्णन मिलता है।


पंचतत्व से जुड़ा है गणपति विसर्जन का भाव
बीएचयू के वैदिक विज्ञान केंद्र के प्रो. विनय कुमार पांडेय के अनुसार गणेशजी को सृष्टि के आधार से जोड़ा गया है। मिट्टी से बनी प्रतिमा का पानी में विलीन होकर प्रकृति में वापस मिलना इसी भाव को दर्शाता है।
गणपति अथर्वशीर्ष में गणेशजी को पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश यानी पंचतत्वों के स्वरूप के रूप में बताया गया है। गणेश पुराण की स्तुति में भी अग्नि, सूर्य, पृथ्वी, जल, समुद्र, चंद्रमा, आकाश, वायु, पेड़-पौधों और जीवों की उत्पत्ति को गणेशजी से जोड़ा गया है।
विसर्जन के बाद मिट्टी से लगाएं पौधा
गणेशोत्सव की याद को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए विसर्जन के बाद बची साफ मिट्टी में पौधा लगाया जा सकता है। धार्मिक ग्रंथों में पेड़-पौधे और उद्यान लगाने को पुण्यदायी कार्य बताया गया है।
इसके लिए केवल दूर्वा या तुलसी का पौधा लगाना जरूरी नहीं है। घर के गमले, बालकनी या बगीचे की जगह और पौधे की जरूरत के अनुसार कोई भी उपयुक्त पौधा लगाया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर इस मिट्टी में सामान्य गार्डन मिट्टी भी मिलाई जा सकती है।
विसर्जन के साथ खत्म न हो अच्छे काम का संकल्प
गणेश स्थापना के समय कई लोग बुरी आदतें छोड़ने और अच्छे कार्य करने का संकल्प लेते हैं। प्रो. पांडेय के अनुसार इस संकल्प को प्रतिमा के विसर्जन के साथ खत्म नहीं करना चाहिए, बल्कि उसे अपने व्यवहार और दैनिक जीवन में जारी रखना चाहिए।
गणेशजी को बुद्धि, विवेक और सही निर्णय का देवता माना जाता है। ऐसे में गणेशोत्सव के दौरान लिए गए सकारात्मक संकल्पों को आगे भी निभाना इस पर्व की भावना को रोजमर्रा के जीवन से जोड़ने का एक तरीका माना जा सकता है।
 

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