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Ganesh Ji Story: आखिर भगवान गणेश को क्यों कहा जाता है 'प्रथम पूज्य'? जानें इसके पीछे छिपी रोचक पौराणिक कथा

Ganesh Ji Story: आखिर भगवान गणेश को क्यों कहा जाता है 'प्रथम पूज्य'? जानें इसके पीछे छिपी रोचक पौराणिक कथा

सनातन धर्म में भगवान गणेश को 'प्रथम पूज्य' और 'विघ्नहर्ता' के नाम से जाना जाता है। किसी भी शुभ कार्य, यज्ञ, विवाह, गृह प्रवेश या नए कार्य की शुरुआत से पहले सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण और पूजन किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से कार्य बिना किसी विघ्न के सफलतापूर्वक संपन्न होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान गणेश को सबसे पहले पूजा जाने का अधिकार कैसे मिला? इसके पीछे एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा प्रचलित है।

कैसे मिले 'प्रथम पूज्य' बनने का वरदान?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार सभी देवी-देवताओं के बीच यह प्रश्न उठा कि सबसे पहले किस देवता की पूजा की जानी चाहिए। इस पर भगवान शिव और माता पार्वती ने अपने दोनों पुत्रों भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय की परीक्षा लेने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि जो सबसे पहले पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा करके लौट आएगा, वही प्रथम पूज्य कहलाएगा और हर शुभ कार्य में सबसे पहले उसी की पूजा होगी।

भगवान कार्तिकेय निकल पड़े, गणेश जी ने अपनाई बुद्धिमानी

भगवान कार्तिकेय अपने वाहन मयूर पर सवार होकर पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा के लिए निकल पड़े। वहीं, भगवान गणेश ने अपनी बुद्धि और विवेक का परिचय दिया। उन्होंने अपने माता-पिता भगवान शिव और माता पार्वती को ही समस्त सृष्टि का स्वरूप मानते हुए उनकी सात बार परिक्रमा की।जब भगवान शिव ने इसका कारण पूछा, तो गणेश जी ने कहा कि "मेरे लिए माता-पिता ही संपूर्ण ब्रह्मांड हैं। उनकी परिक्रमा करना पूरे जगत की परिक्रमा के समान है।"

भगवान शिव ने दिया 'प्रथम पूज्य' का आशीर्वाद

भगवान गणेश की बुद्धिमत्ता, माता-पिता के प्रति सम्मान और गहरी समझ से प्रसन्न होकर भगवान शिव और माता पार्वती ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि संसार में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत उनसे ही होगी। तभी से भगवान गणेश 'प्रथम पूज्य' कहलाए।इसके साथ ही उन्हें 'विघ्नहर्ता' का स्वरूप भी माना गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी भक्त किसी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश का स्मरण करता है, उसके कार्य में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।

'विघ्नहर्ता' क्यों कहलाते हैं गणेश जी?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश अपने भक्तों के जीवन से विघ्न, संकट और बाधाओं को दूर करते हैं। इसलिए उन्हें विघ्नहर्ता कहा जाता है। यही कारण है कि विवाह, गृह प्रवेश, व्यवसाय की शुरुआत, परीक्षा, यात्रा और अन्य मांगलिक कार्यों से पहले गणेश पूजन की परंपरा आज भी निभाई जाती है।

धार्मिक महत्व

बुधवार का दिन भगवान गणेश की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन गणेश जी को दूर्वा, लाल पुष्प और मोदक अर्पित कर "ॐ गं गणपतये नमः" मंत्र का जाप करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे बुद्धि, सुख-समृद्धि और कार्यों में सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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