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पहला करवा चौथ और शुक्र अस्त का संशय! क्या नवविवाहिता को रखना चाहिए उपवास? जानें ज्योतिषियों की सटीक राय

पहला करवा चौथ और शुक्र अस्त का संशय! क्या नवविवाहिता को रखना चाहिए उपवास? जानें ज्योतिषियों की सटीक राय

करवा चौथ का त्योहार सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास होता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं। लेकिन जिन महिलाओं का इस साल पहला करवा चौथ है, उनके मन में व्रत को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि शुक्र ग्रह के अस्त होने के कारण नवविवाहित महिलाओं को इस बार करवा चौथ का व्रत नहीं रखना चाहिए।

दरअसल, शुक्र ग्रह के अस्त और उदय को लेकर चल रही चर्चाओं ने कई महिलाओं को असमंजस में डाल दिया है। बताया जा रहा है कि शुक्र 28 अक्टूबर की रात को उदित हो जाएंगे, जबकि करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर को रखा जाएगा। ऐसे में सवाल है कि क्या नवविवाहित महिलाएं अपना पहला करवा चौथ रख सकती हैं या उन्हें इस बार व्रत करने से बचना चाहिए? आइए जानते हैं ज्योतिषियों की राय।

क्या नवविवाहित महिलाएं रख सकती हैं पहला करवा चौथ?

ज्योतिषाचार्य नंदिता पांडेय के अनुसार, शुक्र ग्रह के उदय होने के बाद करवा चौथ का व्रत रखने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर किए जा रहे उन दावों पर सवाल उठाए हैं, जिनमें शुक्र के अस्त होने की वजह से नवविवाहित महिलाओं को व्रत न रखने की सलाह दी जा रही है।

उनके मुताबिक, शुक्र का संबंध वैवाहिक सुख और सुहाग से माना जाता है। करवा चौथ पर महिलाएं माता गौरी और माता लक्ष्मी को सुहाग की सामग्री अर्पित करती हैं और सुहाग सामग्री का दान भी करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन परंपराओं को शुभ माना जाता है।

नंदिता पांडेय का कहना है कि शुक्र के उदित होने के बाद व्रत रखने को लेकर अनावश्यक भ्रम नहीं पालना चाहिए। हालांकि, शुक्र की स्थिति और उसके प्रभाव को लेकर अलग-अलग ज्योतिषीय मत हो सकते हैं।

पंडित राकेश झा ने भी दूर किया भ्रम

पंडित राकेश झा के मुताबिक, सोशल मीडिया पर शुक्र के अस्त होने के कारण करवा चौथ का व्रत नहीं रखने से जुड़े दावों पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए। उनके अनुसार, कई बार अधूरी जानकारी के आधार पर वीडियो बनाकर लोगों के बीच भ्रम फैलाया जाता है।

उन्होंने बताया कि यदि शुक्र ग्रह करवा चौथ के दिन अस्त अवस्था में होते, तो इस विषय पर विचार करने की जरूरत हो सकती थी। लेकिन उनके मुताबिक, शुक्र 28 अक्टूबर की रात को उदित हो जाएंगे और अगले दिन करवा चौथ का व्रत रखा जाएगा। इसलिए नवविवाहित महिलाओं को केवल सोशल मीडिया पर चल रहे दावों के कारण अपना पहला व्रत छोड़ने की जरूरत नहीं है।

पंडित राकेश झा ने इस बार के ज्योतिषीय संयोगों को भी शुभ बताया है। उनके अनुसार, करवा चौथ पर शुक्र का तुला राशि में होना और चंद्रमा का वृषभ राशि में रोहिणी नक्षत्र के साथ होना धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।

करवा चौथ पर शुक्र ग्रह का क्या है महत्व?

ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह को प्रेम, वैवाहिक सुख, आकर्षण और भौतिक सुविधाओं का कारक माना जाता है। इसी वजह से शुक्र के अस्त होने और उदय होने को लेकर विवाह तथा अन्य मांगलिक कार्यों के संदर्भ में चर्चा होती है।

हालांकि, करवा चौथ एक पारंपरिक सुहाग पर्व है और इसे लेकर अलग-अलग परिवारों तथा परंपराओं में मान्यताएं भिन्न हो सकती हैं। इसलिए व्रत रखने या न रखने का निर्णय केवल सोशल मीडिया पर प्रसारित दावों के आधार पर नहीं लेना चाहिए।

पहली बार करवा चौथ रखने वाली महिलाएं क्या करें?

अगर आप इस साल पहली बार करवा चौथ का व्रत रखने जा रही हैं, तो शुक्र के अस्त होने से जुड़ी अफवाहों के कारण परेशान होने की जरूरत नहीं है। लेख में बताए गए ज्योतिषियों के अनुसार, 28 अक्टूबर की रात शुक्र के उदय होने के बाद 29 अक्टूबर को व्रत रखने में कोई बाधा नहीं मानी जा रही है।

फिर भी, अपने परिवार की परंपरा का पालन करने वाली महिलाएं किसी विश्वसनीय स्थानीय ज्योतिषाचार्य से सलाह ले सकती हैं। सबसे जरूरी है कि व्रत श्रद्धा, सही जानकारी और अपनी सेहत को ध्यान में रखकर किया जाए।

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