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सावन के हर सोमवार को यहां होती है महाआरती, बेलपत्र-धतूरे से होता है विशेष शृंगार; सदियों पुरानी परंपरा आज भी कायम

सावन के हर सोमवार को यहां होती है महाआरती, बेलपत्र-धतूरे से होता है विशेष शृंगार; सदियों पुरानी परंपरा आज भी कायम

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। देशभर के शिव मंदिरों में इस दौरान अलग-अलग धार्मिक अनुष्ठान और परंपराएं निभाई जाती हैं। कई मंदिरों में सावन के सोमवार को होने वाली पूजा का विशेष महत्व है। ऐसी ही एक सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा आज भी जारी है, जिसमें सावन के प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव की महाआरती के साथ विशेष शृंगार किया जाता है। सावन सोमवार के दिन भगवान शिव का बेलपत्र और धतूरे से विशेष शृंगार किया जाता है। श्रद्धालु सुबह से ही मंदिर पहुंचकर शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं और बेलपत्र, धतूरा समेत अन्य पूजन सामग्री चढ़ाते हैं। मान्यता है कि भगवान शिव को बेलपत्र और धतूरा प्रिय हैं और सावन में इन्हें अर्पित करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

कुंड में पवित्र स्नान की परंपरा

इस धार्मिक परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मंदिर परिसर स्थित कुंड में पवित्र स्नान भी है। सावन सोमवार को श्रद्धालु कुंड में स्नान कर भगवान शिव के दर्शन और पूजन करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार पवित्र जल में स्नान करने के बाद शिव आराधना करने से मन और शरीर की शुद्धि होती है।कुंड में स्नान के बाद श्रद्धालु मंदिर में पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। इसके बाद बेलपत्र और धतूरे से भगवान का शृंगार किया जाता है।

शाम को होती है महाआरती

सावन के प्रत्येक सोमवार की शाम मंदिर में विशेष महाआरती का आयोजन किया जाता है। आरती के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। घंटे-घड़ियाल और शंख की ध्वनि से मंदिर परिसर भक्तिमय हो जाता है। श्रद्धालु भगवान शिव का जयकारा लगाते हुए आरती में शामिल होते हैं।

मनोकामना पूरी होने पर अखंड रामायण और रुद्राभिषेक

इस मंदिर की परंपरा में मनोकामना पूरी होने के बाद विशेष धार्मिक अनुष्ठान कराने की मान्यता भी जुड़ी हुई है। श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने पर अखंड रामायण पाठ और रुद्राभिषेक करवाते हैं। कई परिवार पीढ़ियों से इस परंपरा का पालन करते आ रहे हैं।रुद्राभिषेक को भगवान शिव की विशेष पूजा माना जाता है। इसमें शिवलिंग का विभिन्न पूजन सामग्री से अभिषेक किया जाता है और मंत्रों का जाप किया जाता है। वहीं अखंड रामायण पाठ के दौरान लगातार रामचरितमानस का पाठ किया जाता है।सदियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनी हुई है। आधुनिक दौर में भी सावन सोमवार के अवसर पर बड़ी संख्या में लोग मंदिर पहुंचकर धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं। मंदिर में होने वाले विशेष शृंगार, महाआरती, पवित्र स्नान और रुद्राभिषेक की परंपरा श्रद्धालुओं को अपनी धार्मिक विरासत से जोड़ती है।

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