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नरक चतुर्दशी और दिवाली पर जरूर करें ये खास उपाय! भविष्य पुराण में बताया गया है अलक्ष्मी को घर से दूर करने का तरीका

नरक चतुर्दशी और दिवाली पर जरूर करें ये खास उपाय! भविष्य पुराण में बताया गया है अलक्ष्मी को घर से दूर करने का तरीका

हिंदू धर्म में दिवाली का त्योहार सिर्फ दीप जलाने और मां लक्ष्मी की पूजा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़ी कई धार्मिक परंपराएं और मान्यताएं भी हैं। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी और अमावस्या को दीपावली मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता है कि नरक चतुर्दशी पर विशेष स्नान, पूजा और दीपदान करने से नरक का भय दूर होता है, जबकि दिवाली पर दीप जलाने से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता का संचार होता है।

भविष्य पुराण में भगवान श्रीकृष्ण और राजा युधिष्ठिर के संवाद के माध्यम से दीपोत्सव की परंपराओं का वर्णन मिलता है। इसमें बताया गया है कि जो व्यक्ति दरिद्रता यानी अलक्ष्मी को घर से दूर रखना चाहता है, उसे नरक चतुर्दशी से लेकर दिवाली तक कुछ विशेष धार्मिक विधियां करनी चाहिए। इस बार नरक चतुर्दशी और दिवाली एक ही दिन पड़ने के संयोग को देखते हुए इन परंपराओं का महत्व और बढ़ जाता है।

नरक चतुर्दशी पर सुबह जरूर करें ये काम

भविष्य पुराण के अनुसार, नरक चतुर्दशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विशेष स्नान करने से नरक का भय दूर होता है।

इसके बाद अपामार्ग यानी चिचिड़ा के पत्तों को सिर के ऊपर से घुमाने की परंपरा बताई गई है। फिर यमराज के विभिन्न नामों का स्मरण करते हुए तर्पण किया जाता है। इनमें यम, धर्मराज, मृत्यु, वैवस्वत, अंतक, काल और सर्वभूतक्षय जैसे नाम शामिल हैं।

इसके बाद भगवान शिव, भगवान विष्णु और ब्रह्माजी सहित देवी-देवताओं की पूजा करके दीप जलाने का विधान बताया गया है।

भविष्य पुराण में क्या है नरक चतुर्दशी की कथा?

भविष्य पुराण में भगवान श्रीकृष्ण राजा युधिष्ठिर को दीपोत्सव का महत्व बताते हुए राजा बलि की कथा सुनाते हैं। कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण करके दानवराज बलि से तीन पग भूमि मांगी थी। इसके बाद उन्होंने अपने विराट स्वरूप से तीनों लोकों को नाप लिया और राजा बलि को पाताल लोक में स्थान दिया।

भगवान विष्णु ने बलि के यहां रहने का वचन भी दिया था। पुराण में कार्तिक अमावस्या की रात को दीपोत्सव मनाने और राजा बलि के शासन से जुड़ी मान्यताओं का वर्णन मिलता है।

जब राजा युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से कार्तिक अमावस्या की पूजा और उत्सव की विधि पूछी, तो श्रीकृष्ण ने उन्हें नरक चतुर्दशी से लेकर दिवाली तक किए जाने वाले धार्मिक कार्यों के बारे में बताया।

दिवाली की शाम इन जगहों पर जलाएं दीपक

भविष्य पुराण के अनुसार, दिवाली के दिन घर के साथ-साथ आसपास के प्रमुख स्थानों पर भी दीप जलाने की परंपरा बताई गई है। प्रदोष काल में शिव, विष्णु और ब्रह्मा के मंदिरों में दीप प्रज्वलित करना शुभ माना गया है।

इसके अलावा कोषागार, सभामंडप, नदी के किनारे, महल, तालाब, बगीचे, कुएं, रास्तों और पशुशालाओं में भी दीप जलाने का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि दीपों की रोशनी से वातावरण पवित्र और मंगलमय बनता है।

दिवाली पर घर को सजाने और खुशियां बांटने की परंपरा

पुराण में बताया गया है कि अमावस्या के दिन सुबह स्नान करके देवताओं और पितरों का पूजन-तर्पण करना चाहिए। इसके बाद जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को भोजन, वस्त्र तथा दक्षिणा देने की परंपरा का भी उल्लेख मिलता है।

दिवाली के अवसर पर घरों और नगरों को साफ-सुथरा करके रंग-बिरंगे तोरण, फूलों की मालाओं और बंदनवार से सजाने की बात कही गई है। लोगों को अच्छे वस्त्र पहनकर आपसी प्रेम और उत्साह के साथ त्योहार मनाना चाहिए। गीत-संगीत और नृत्य के माध्यम से खुशियां बांटने का भी वर्णन मिलता है।

अलक्ष्मी को घर से बाहर करने की बताई गई है यह परंपरा

भविष्य पुराण में दरिद्रता यानी अलक्ष्मी को घर से दूर करने के लिए एक विशेष परंपरा का उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार, आधी रात के बाद जब घर के सभी लोग सो जाएं, तब घर की महिलाएं सूप बजाते हुए घर के अंदर से आंगन तक जाती थीं।

धार्मिक मान्यता के मुताबिक, इस परंपरा का उद्देश्य घर से दरिद्रता और नकारात्मकता को बाहर करना था। इसे अलक्ष्मी के निष्कासन से जोड़कर देखा जाता है।

राजा बलि की पूजा का भी है विशेष महत्व

पुराण में दिवाली के बाद राजा बलि की पूजा और उनसे सुख-समृद्धि की कामना करने का भी उल्लेख मिलता है। इसके लिए भूमि पर रंगों से मंडल बनाकर राजा बलि और उनकी पत्नी विंध्यावली की प्रतिमा स्थापित करने की परंपरा बताई गई है।

इसके बाद फूल, चंदन, दीप, अक्षत, नैवेद्य और अन्य पूजन सामग्री से उनकी पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस पूजा के माध्यम से राजा बलि से प्रसन्नता, सुख और कल्याण की कामना की जाती है।

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