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व्रत खोलते समय भूलकर भी न करें ये 7 बड़ी गलतियां! जानिए पंडित जी से नवरात्रि पारण के सही और सटीक नियम

व्रत खोलते समय भूलकर भी न करें ये 7 बड़ी गलतियां! जानिए पंडित जी से नवरात्रि पारण के सही और सटीक नियम

शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करने के बाद भक्त व्रत का पारण करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में व्रत रखने के साथ-साथ उसे सही विधि से खोलना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। पारण का अर्थ नौ दिनों के उपवास के बाद व्रत समाप्त करना है। इस दौरान पूजा-पाठ, तिथि, पारिवारिक परंपरा और स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए।ज्योतिषाचार्य पिनाकी मिश्रा के अनुसार, नवरात्रि व्रत का पारण केवल भोजन करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह श्रद्धा, संयम और पूजा-विधि से भी जुड़ा होता है। आइए जानते हैं कि नवरात्रि व्रत का पारण करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

1. अष्टमी या नवमी, कब करें व्रत का पारण?

नवरात्रि व्रत का पारण कब करना चाहिए, यह व्रत रखने वाले व्यक्ति की परंपरा और पूजा-विधि पर निर्भर करता है। कई परिवारों में अष्टमी के दिन कन्या पूजन के बाद व्रत खोला जाता है, जबकि कुछ परिवार नवमी तिथि पर कन्या पूजन, हवन और पूजा करने के बाद पारण करते हैं।

इसलिए व्रत खोलने के लिए अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथि और समय का ध्यान रखें। सभी लोगों के लिए एक ही दिन या समय को अनिवार्य मानना उचित नहीं है।

2. कन्या पूजन और हवन की विधि पूरी करें

नवरात्रि की अष्टमी या नवमी पर कन्या पूजन करने की परंपरा है। भक्त छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनकी पूजा करते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार भोजन, फल, उपहार या दक्षिणा देते हैं।

जिन परिवारों में हवन या विशेष पूजा का विधान है, उन्हें अपनी परंपरा के अनुसार अनुष्ठान पूरा करना चाहिए। इसके बाद व्रत का पारण किया जा सकता है।

3. मां दुर्गा की पूजा और आरती के बाद खोलें व्रत

व्रत खोलने से पहले मां दुर्गा को प्रणाम करें और श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करें। मां को पुष्प, फल और प्रसाद अर्पित करें। इसके बाद आरती करके परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और कल्याण की कामना करें।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा के बाद मां का प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलना शुभ माना जाता है।

4. पारण में सात्विक भोजन को दें प्राथमिकता

नवरात्रि का व्रत खोलते समय अपनी व्रत परंपरा के अनुसार सात्विक भोजन करें। लंबे समय तक उपवास रखने के बाद हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन लेना बेहतर रहता है।

आप अपनी परंपरा और सहनशीलता के अनुसार फल, दही, खिचड़ी या हल्का घर का बना भोजन ले सकते हैं। यदि आप अनाज का सेवन पारण के बाद ही करते हैं, तो उसी के अनुसार भोजन करें।

5. व्रत खोलते ही ज्यादा खाना खाने से बचें

नौ दिनों तक उपवास रखने के बाद अचानक बहुत अधिक भोजन करना परेशानी पैदा कर सकता है। इसलिए पारण की शुरुआत कम मात्रा में भोजन से करें और शरीर की प्रतिक्रिया के अनुसार धीरे-धीरे सामान्य आहार लें।

शुरुआत में बहुत ज्यादा तला-भुना, मसालेदार या भारी भोजन खाने से बचना बेहतर है। पर्याप्त पानी पिएं और कमजोरी या चक्कर आने जैसी परेशानी को नजरअंदाज न करें। मधुमेह या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों को उपवास और पारण के दौरान डॉक्टर की सलाह का ध्यान रखना चाहिए।

6. व्रत के समापन पर जरूरतमंदों को दान करें

नवरात्रि व्रत समाप्त होने पर अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद लोगों को भोजन, फल, वस्त्र या अन्य आवश्यक चीजें दान कर सकते हैं। धार्मिक परंपराओं में दान और सेवा को पुण्य का कार्य माना जाता है।

दान करते समय अपनी सामर्थ्य का ध्यान रखें और जरूरतमंद व्यक्ति की आवश्यकताओं का सम्मान करें। इसके लिए किसी बड़ी राशि या महंगे उपहार की जरूरत नहीं है।

7. व्रत के बाद भी बनाए रखें संयम और सकारात्मकता

नवरात्रि का उद्देश्य केवल भोजन से परहेज करना नहीं, बल्कि श्रद्धा, आत्मसंयम और साधना से भी जुड़ा है। इसलिए व्रत पूरा होने के बाद भी दूसरों के प्रति सम्मान, दया और करुणा का भाव बनाए रखना चाहिए।

मां दुर्गा की आराधना के साथ अच्छे विचारों और व्यवहार को अपनाना भी इस पर्व की भावना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

नवरात्रि व्रत पारण में इन बातों का रखें ध्यान

  • अष्टमी या नवमी का पारण अपनी परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार करें।

  • कन्या पूजन, हवन और विशेष पूजा अपनी निर्धारित विधि से पूरी करें।

  • मां दुर्गा की पूजा और आरती के बाद श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण करें।

  • व्रत खोलते समय हल्का और सात्विक भोजन करें।

  • लंबे उपवास के बाद एक साथ बहुत ज्यादा भोजन न करें।

  • सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य और जरूरतमंदों की सेवा करें।

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