नवरात्रि में घट स्थापना के बाद भूलकर भी ना करें ये 3 गलतियां, जान लें पूजा के नियम
नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की आराधना और शक्ति उपासना के लिए विशेष माना जाता है। इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं। नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में घट स्थापना यानी कलश स्थापना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलश स्थापना के साथ ही नवरात्रि की पूजा शुरू होती है। इस दौरान पूजा की पवित्रता, नियमों और नियमित आराधना का विशेष ध्यान रखा जाता है।
मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान श्रद्धा और अनुशासन के साथ पूजा करने से मन को शांति मिलती है। ऐसे में घट स्थापना के बाद कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। आइए जानते हैं ऐसी तीन गलतियों के बारे में, जिनसे नवरात्रि की पूजा करते समय बचने की सलाह दी जाती है।
1. घट स्थापना के बाद कलश को बार-बार न हटाएं
नवरात्रि के पहले दिन पूजा स्थल पर विधि-विधान से कलश स्थापित किया जाता है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, कलश को पूजा के लिए तय किए गए स्थान पर ही रखना चाहिए। स्थापना के बाद उसे बार-बार एक जगह से दूसरी जगह ले जाने से बचने की सलाह दी जाती है।
कलश स्थापित करते समय स्थान की साफ-सफाई का ध्यान रखें और ऐसी जगह चुनें, जहां पूजा करना सुविधाजनक हो। यदि किसी जरूरी कारण से कलश हटाना पड़े, तो अपनी पारिवारिक परंपरा या जानकार पुरोहित से सलाह ली जा सकती है।
2. पूजा स्थल की साफ-सफाई और पवित्रता की अनदेखी न करें
नवरात्रि के दौरान पूजा स्थल को साफ और व्यवस्थित रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। जहां कलश स्थापित किया गया है, वहां गंदगी न होने दें। पूजा में इस्तेमाल होने वाले फूल, जल और दूसरी सामग्री को भी व्यवस्थित रखें।
धार्मिक परंपराओं में स्वच्छता को पूजा का अहम हिस्सा माना गया है। इसलिए रोजाना पूजा स्थल की सफाई करें और मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर के आसपास साफ-सफाई बनाए रखें। पूजा के लिए बैठने से पहले हाथ-पैर साफ करना और श्रद्धा के साथ आराधना करना भी अच्छी परंपरा मानी जाती है।
3. नवरात्रि में पूजा और आरती को पूरी तरह नजरअंदाज न करें
नवरात्रि के दौरान कई परिवार सुबह और शाम मां दुर्गा की पूजा तथा आरती करते हैं। कुछ घरों में अखंड ज्योति जलाने की परंपरा भी होती है। ऐसी स्थिति में दीपक और ज्योति की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
यदि अखंड ज्योति जलाई जाती है, तो उसे सुरक्षित स्थान पर रखें और ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें। घर में किसी जिम्मेदार व्यक्ति की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करें। पूजा का समय ऐसा तय करना उपयोगी है, जिसे पूरे नौ दिनों तक नियमित रूप से निभाया जा सके।
ध्यान रखें कि हर परिवार की पूजा पद्धति अलग हो सकती है। इसलिए पूजा के नियमों का पालन अपनी परंपरा और श्रद्धा के अनुसार करना चाहिए।
घट स्थापना के बाद इन बातों का भी रखें ध्यान
नवरात्रि के दौरान भक्त अपनी मान्यताओं के अनुसार व्रत रखते हैं और सात्विक भोजन करते हैं। पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री को साफ रखें और मां दुर्गा के मंत्रों का जाप श्रद्धापूर्वक करें। यदि घर में जौ बोए जाते हैं, तो उनकी देखभाल और आवश्यकतानुसार पानी देने का ध्यान रखें।
नवरात्रि का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान करना ही नहीं, बल्कि संयम, सद्भाव और सकारात्मक विचारों को जीवन में अपनाना भी है। इन दिनों जरूरतमंदों की सहायता करना और परिवार के साथ अच्छा व्यवहार करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
नवरात्रि में नियमों से ज्यादा महत्वपूर्ण है श्रद्धा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घट स्थापना के बाद पूजा में नियमितता और स्वच्छता बनाए रखना शुभ माना जाता है। हालांकि, पूजा में किसी छोटी भूल को लेकर भयभीत होने की जरूरत नहीं है। अपनी परंपरा के अनुसार श्रद्धा और शांत मन से मां दुर्गा की आराधना करना ही सबसे महत्वपूर्ण है।

