Diwali Lakshmi Puja 2026: घर और ऑफिस में सिर्फ 10 मिनट में करें लक्ष्मी-गणेश की पूजा, जानें पूरी विधि और पूजन सामग्री
दीपावली का त्योहार मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस साल 8 नवंबर, रविवार को दीपावली मनाई जाएगी। इस दिन लक्ष्मी पूजन के लिए कुल 9 मुहूर्त बताए गए हैं। श्रद्धालु अपनी सुविधा और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर के अलावा ऑफिस, दुकान या व्यापारिक प्रतिष्ठान में भी पूजा कर सकते हैं।
दीपावली पर मां लक्ष्मी की पूजा करने से पहले पूजन सामग्री तैयार रखना जरूरी है। सही विधि और श्रद्धा के साथ करीब 10 मिनट में लक्ष्मी-गणेश का संक्षिप्त पूजन किया जा सकता है। आइए जानते हैं पूजा का पूरा क्रम।
10 मिनट में ऐसे करें लक्ष्मी-गणेश का पूजन
1. गणेश-लक्ष्मी का आह्वान: सबसे पहले पूजा स्थल पर भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। दीपक जलाकर दोनों देवी-देवताओं का ध्यान करें और पूजा में पधारने का आह्वान करें।
2. स्नान कराएं: इसके बाद प्रतिमाओं को स्वच्छ जल से स्नान कराएं। फिर पंचामृत, गंध और इत्र से स्नान कराने की परंपरा निभाएं। अंत में स्वच्छ जल अर्पित करें।
3. अभिषेक और पंचोपचार पूजा: इसके बाद भगवान गणेश और माता लक्ष्मी का अभिषेक करें। धूप, दीप, फूल, चंदन और नैवेद्य अर्पित करके पंचोपचार पूजन करें।
4. अष्टलक्ष्मी पूजन: मां लक्ष्मी के आठ स्वरूपों यानी अष्टलक्ष्मी का ध्यान और पूजन करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अष्टलक्ष्मी की आराधना से जीवन में धन, धान्य, साहस, ज्ञान और समृद्धि की कामना की जाती है।
5. नैवेद्य अर्पित करें: पूजा के दौरान फल, मिठाई और अन्य सात्विक पकवान मां लक्ष्मी और भगवान गणेश को भोग के रूप में चढ़ाएं।
6. आरती के साथ पूजा पूरी करें: आखिर में लक्ष्मी-गणेश की आरती करें। परिवार के सभी सदस्य आरती में शामिल होकर सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना करें।
पूजा से पहले जुटा लें जरूरी सामान
लक्ष्मी पूजन के लिए प्रतिमा या तस्वीर, पूजा की चौकी, लाल कपड़ा, जल, पंचामृत की सामग्री, चंदन, रोली, अक्षत, फूल, माला, धूप, दीपक, घी, बाती, इत्र, फल, मिठाई और नैवेद्य पहले से तैयार रखें। आरती के लिए थाली और कपूर भी रख लें।
दीपावली पर पूजा करते समय स्थानीय पंचांग में दिए गए शुभ मुहूर्त का ध्यान रखें। घर हो या कारोबार का स्थान, स्वच्छता और श्रद्धा के साथ पूजा करना इस पर्व की प्रमुख परंपरा है।

