Samachar Nama
×

Diwali 2026: 8 नवंबर को मनाई जाएगी छोटी और बड़ी दिवाली, जानें नरक चतुर्दशी और लक्ष्मी पूजा की सही तारीख

Diwali 2026: 8 नवंबर को मनाई जाएगी छोटी और बड़ी दिवाली, जानें नरक चतुर्दशी और लक्ष्मी पूजा की सही तारीख

दिवाली 2026 को लेकर इस बार लोगों के बीच छोटी और बड़ी दिवाली की तारीख को लेकर असमंजस बना हुआ है। इसकी वजह चतुर्दशी और अमावस्या तिथि का एक ही दिन के आसपास पड़ना है। छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी और रूप चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है, जबकि बड़ी दिवाली पर प्रदोष काल में अमावस्या तिथि के दौरान मां लक्ष्मी की पूजा करने का विधान है।

तिथियों के इस संयोग के कारण लोगों के मन में सवाल है कि छोटी दिवाली कब मनाई जाएगी और बड़ी दिवाली किस दिन होगी? आइए जानते हैं पंडित राकेश झा के अनुसार, साल 2026 में दिवाली और नरक चतुर्दशी की सही तारीख क्या है।

छोटी दिवाली 2026 कब है? (Choti Diwali Date)

छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सुबह स्नान करने और दीप जलाने का विशेष महत्व माना जाता है। पंडित राकेश झा के अनुसार, इस बार चतुर्दशी तिथि को लेकर खास संयोग बन रहा है।चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर को सुबह 11 बजकर 29 मिनट तक रहेगी। इसके बाद अमावस्या तिथि शुरू हो जाएगी। उदय तिथि और स्नान की परंपरा को ध्यान में रखते हुए छोटी दिवाली को लेकर 8 नवंबर की तारीख बताई गई है।

बड़ी दिवाली 2026 कब मनाई जाएगी? (Diwali Date)

बड़ी दिवाली यानी दीपावली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली का पर्व उस दिन मनाया जाता है, जब प्रदोष काल में अमावस्या तिथि मौजूद हो।

पंडित राकेश झा के मुताबिक, इस साल 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 30 मिनट से अमावस्या तिथि शुरू होगी, जो 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक रहेगी।

ऐसे में 8 नवंबर को प्रदोष काल में अमावस्या तिथि होने के कारण इसी दिन दीपावली मनाना शास्त्र सम्मत माना गया है। इस तरह छोटी और बड़ी दिवाली दोनों 8 नवंबर 2026 को मनाई जाएंगी।

क्यों मनाई जाती है नरक चतुर्दशी? जानें पौराणिक कथा

छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी कहने के पीछे एक पौराणिक कथा प्रचलित है। मान्यता के अनुसार, नरकासुर नाम का एक शक्तिशाली राक्षस था, जिसने अपनी ताकत के बल पर 16 हजार स्त्रियों को बंदी बना लिया था। उसके अत्याचारों से ऋषि-मुनि और देवता भी परेशान थे।

नरकासुर के आतंक से मुक्ति पाने के लिए सभी ने भगवान श्रीकृष्ण से सहायता मांगी। इसके बाद भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध कर बंदी बनाई गई स्त्रियों और देवताओं को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई।

कहा जाता है कि नरकासुर के वध के बाद लोगों ने दीप जलाकर खुशी मनाई थी। जिस दिन उसका वध हुआ, उस दिन चतुर्दशी तिथि थी। इसी वजह से इस पर्व को नरक चतुर्दशी कहा जाने लगा। इस दिन दीप जलाने और सुबह स्नान करने की परंपरा भी प्रचलित है।

छोटी और बड़ी दिवाली की तारीख एक ही क्यों?

इस साल चतुर्दशी और अमावस्या तिथि के समय में ऐसा संयोग बन रहा है, जिसके कारण दोनों पर्वों की तारीख को लेकर भ्रम पैदा हुआ है। पंडित राकेश झा के अनुसार, अमावस्या तिथि 8 नवंबर को प्रदोष काल में मौजूद रहेगी। इसलिए लक्ष्मी पूजन और दीपावली का मुख्य पर्व इसी दिन मनाया जाएगा। वहीं, छोटी दिवाली को लेकर भी 8 नवंबर की तारीख बताई गई है।

Share this story

Tags