Devshayani Ekadashi 2026: देवशयनी एकादशी के दिन भूलकर भी न करें ये काम, भगवान विष्णु की कृपा के लिए रखें इन नियमों का ध्यान
हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। सभी एकादशियों में देवशयनी एकादशी को बेहद खास माना जाता है, क्योंकि इसी दिन से भगवान विष्णु क्षीर सागर में योग निद्रा में चले जाते हैं। इसके बाद से चातुर्मास की शुरुआत होती है, जो करीब चार महीने तक चलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में शुभ और मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है।
साल 2026 में देवशयनी एकादशी का व्रत जुलाई महीने में रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने से विशेष पुण्य फल मिलने की मान्यता है। हालांकि, देवशयनी एकादशी के दिन कुछ कार्यों को करने की मनाही भी बताई गई है। मान्यता है कि इन नियमों का पालन करने से भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है।
देवशयनी एकादशी के दिन क्या नहीं करना चाहिए?
1. चावल का सेवन न करें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी तिथि पर चावल खाना वर्जित माना गया है। माना जाता है कि इस दिन चावल का सेवन करने से व्रत के पुण्य फल में कमी आ सकती है। इसलिए एकादशी पर चावल और उससे बनी चीजों से दूरी रखनी चाहिए।
2. तामसिक भोजन से बचें
देवशयनी एकादशी के दिन मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज और अन्य तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन सात्विक भोजन करने और मन को शांत रखने की सलाह दी जाती है।
3. क्रोध और नकारात्मक विचारों से बचें
एकादशी का दिन भगवान विष्णु की भक्ति और आत्मशुद्धि के लिए माना जाता है। इसलिए इस दिन किसी के प्रति गलत भावना रखना, झूठ बोलना या क्रोध करना शुभ नहीं माना जाता है।
4. तुलसी के पत्ते न तोड़ें
धार्मिक मान्यता है कि एकादशी के दिन तुलसी माता को भगवान विष्णु की पूजा में विशेष स्थान दिया जाता है, लेकिन इस दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित माना गया है। पूजा के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले तोड़कर रखे जा सकते हैं।
5. बाल और नाखून काटने से बचें
देवशयनी एकादशी के दिन बाल कटवाना, शेविंग करना और नाखून काटना शुभ नहीं माना जाता। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन शरीर और मन की शुद्धता पर ध्यान देना चाहिए।
6. भगवान विष्णु की पूजा में लापरवाही न करें
यदि किसी कारण से व्रत नहीं रखा है, तब भी देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु का स्मरण, मंत्र जाप और पूजा करना शुभ माना जाता है। इस दिन भक्ति भाव से पूजा करने से भी पुण्य प्राप्त होने की मान्यता है।
देवशयनी एकादशी का धार्मिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। इस दौरान सृष्टि का संचालन भगवान शिव संभालते हैं। चातुर्मास के दौरान धार्मिक कार्य, पूजा-पाठ और साधना का विशेष महत्व बताया गया है।
देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और दान करने से जीवन में सुख-समृद्धि आने और सभी मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है। इसलिए इस पवित्र दिन पर नियमों का पालन करते हुए श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान विष्णु की आराधना करनी चाहिए।

