Devshayani Ekadashi 2026: देवशयनी एकादशी से शुरू होता है चातुर्मास, इन नियमों का पालन करने से मिलती है भगवान विष्णु की विशेष कृपा
हिंदू धर्म में आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन से भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और चार महीने तक चलने वाला चातुर्मास शुरू हो जाता है। यह अवधि भक्ति, साधना, संयम और धार्मिक कार्यों के लिए बेहद शुभ मानी जाती है। माना जाता है कि चातुर्मास के दौरान किए गए जप, तप, दान और भगवान विष्णु की पूजा का कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है।
आइए जानते हैं कि देवशयनी एकादशी से शुरू होने वाले चातुर्मास में कौन-से नियम अपनाने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त हो सकती है।
1. भगवान विष्णु की नियमित पूजा करें
चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। पीले फूल, तुलसी दल और पंचामृत अर्पित करें। साथ ही 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।
2. तुलसी की सेवा और पूजा करें
तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय मानी जाती हैं। रोजाना तुलसी में जल अर्पित करें, दीपक जलाएं और परिक्रमा करें। मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
3. सात्विक भोजन और संयम रखें
चातुर्मास को आत्मसंयम का समय माना गया है। इस दौरान सात्विक भोजन करने, क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। कई श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार कुछ विशेष खाद्य पदार्थों का भी त्याग करते हैं।
4. दान-पुण्य जरूर करें
गरीब और जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, छाता, फल या दक्षिणा का दान करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि चातुर्मास में किया गया दान विशेष पुण्य प्रदान करता है।
5. धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें
इस अवधि में भगवद्गीता, विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भागवत या रामचरितमानस का नियमित पाठ करना लाभकारी माना जाता है। इससे मन में शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।
6. एकादशी व्रत का पालन करें
चातुर्मास के दौरान आने वाली सभी एकादशियों का श्रद्धापूर्वक व्रत रखने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इससे भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
7. अच्छे कर्म और सेवा का संकल्प लें
जरूरतमंदों की सहायता करना, पशु-पक्षियों को भोजन देना, पेड़-पौधे लगाना और माता-पिता व गुरु का सम्मान करना भी चातुर्मास में पुण्यदायी कार्य माने जाते हैं।
चातुर्मास में किन कार्यों से बचने की मान्यता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चातुर्मास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य बड़े मांगलिक कार्य सामान्यतः नहीं किए जाते। हालांकि, विभिन्न परंपराओं और क्षेत्रों में इन नियमों में अंतर हो सकता है।
क्या है चातुर्मास का महत्व?
चातुर्मास केवल धार्मिक अनुष्ठानों का समय नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, अनुशासन और आध्यात्मिक उन्नति का भी अवसर माना जाता है। इस दौरान किए गए शुभ कर्म व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता, मानसिक शांति और ईश्वर के प्रति श्रद्धा को मजबूत करने वाले माने जाते हैं।

