नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा, व्रत और कथा श्रवण का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। श्रद्धालु नौ दिनों तक मां भगवती के नौ स्वरूपों की आराधना करते हैं और सुख, शांति, समृद्धि तथा परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।
श्री दुर्गा नवरात्रि व्रत कथा
एक समय की बात है, एक राजा और एक वैश्य अपने जीवन की परेशानियों से दुखी होकर वन में चले गए। वहां उनकी मुलाकात मेधा ऋषि से हुई। दोनों ने ऋषि से अपने दुखों का कारण पूछा। ऋषि ने उन्हें आदिशक्ति मां दुर्गा की महिमा बताई और देवी की आराधना करने की सलाह दी।राजा और वैश्य ने नदी के तट पर जाकर श्रद्धा और भक्ति से मां भगवती की पूजा की। उन्होंने उपवास रखा, देवी का ध्यान किया और मंत्रों का जाप करते हुए मां से अपनी मनोकामनाएं पूरी करने की प्रार्थना की।
उनकी कठोर भक्ति से प्रसन्न होकर मां दुर्गा उनके सामने प्रकट हुईं। देवी ने दोनों को आशीर्वाद दिया और उनकी इच्छाओं को पूरा करने का वरदान दिया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां भगवती की कृपा से राजा को अपना राज्य और वैश्य को ज्ञान एवं सुख की प्राप्ति हुई।तभी से नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की पूजा और व्रत कथा सुनने की परंपरा चली आ रही है। मान्यता है कि श्रद्धा के साथ नवरात्रि व्रत रखने और देवी की कथा सुनने से भक्त को माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
नवरात्रि में क्या करें
नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करें। माता को लाल फूल, चुनरी, फल और नैवेद्य अर्पित करें। सुबह-शाम दीपक जलाकर दुर्गा मंत्र और देवी स्तोत्र का पाठ करें। व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य और परंपरा के अनुसार उपवास करते हैं।

