Bhaum Pradosh Vrat: भौम प्रदोष पर शिवलिंग अभिषेक में न करें ये 3 गलतियां, जानें सही पूजा विधि
भौम प्रदोष व्रत भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। जब प्रदोष व्रत मंगलवार के दिन पड़ता है, तो इसे भौम प्रदोष कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव का अभिषेक, पूजा और मंत्र जाप करने से जीवन में सुख-शांति और संकटों से राहत की कामना की जाती है।
शिवलिंग पर जल और दूध से अभिषेक करने की परंपरा है, लेकिन पूजा के दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है।
शिवलिंग अभिषेक में न करें ये 3 गलतियां
1. तांबे के बर्तन से दूध चढ़ाने से बचें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग पर दूध चढ़ाते समय तांबे के पात्र का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि तांबे के संपर्क में दूध के गुण बदल सकते हैं। इसलिए दूध अर्पित करने के लिए चांदी, पीतल या स्टील के पात्र का उपयोग करना शुभ माना जाता है।
2. अशुद्ध दूध या सामग्री अर्पित न करें
भगवान शिव को अर्पित करने के लिए हमेशा साफ और शुद्ध सामग्री का उपयोग करने की परंपरा है। खराब या अशुद्ध दूध, कटे-फटे फूल या बासी सामग्री चढ़ाने से बचने की सलाह दी जाती है।
3. शिवलिंग पर हल्दी न चढ़ाएं
कई धार्मिक मान्यताओं में शिवलिंग पर हल्दी अर्पित करने से बचने की बात कही गई है। हालांकि, शिव परिवार के अन्य देवी-देवताओं की पूजा में हल्दी का विशेष महत्व माना जाता है।
भौम प्रदोष पर शिव पूजा की सही विधि
- सुबह स्नान करके व्रत और पूजा का संकल्प लें।
- शाम के समय भगवान शिव का ध्यान करें।
- शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक करें।
- बेलपत्र, फूल और फल अर्पित करें।
- भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें।
- हनुमान जी की पूजा और हनुमान चालीसा का पाठ भी शुभ माना जाता है।
भौम प्रदोष व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भौम प्रदोष पर भगवान शिव और हनुमान जी की पूजा करने से कर्ज, बाधाओं और परेशानियों से मुक्ति की कामना की जाती है। इस दिन श्रद्धा और नियमों के साथ पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होने का विश्वास है।

