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Bhadrapada 2026: भाद्रपद शुरू होते ही क्या 15 दिन बंद हो जाएंगे शुभ काम? जानें कृष्ण पक्ष में क्या करें और क्या नहीं
 

Bhadrapada 2026: भाद्रपद शुरू होते ही क्या 15 दिन बंद हो जाएंगे शुभ काम? जानें कृष्ण पक्ष में क्या करें और क्या नहीं


सावन पूर्णिमा के साथ ही 29 अगस्त से हिंदू पंचांग का छठा महीना भाद्रपद यानी भादों शुरू हो गया है। धार्मिक मान्यताओं में इस महीने को व्रत, पूजा-पाठ, संयम और आध्यात्मिक साधना के लिए बेहद खास माना जाता है। भाद्रपद के शुरुआती 15 दिन कृष्ण पक्ष के होते हैं, इसलिए लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या इस दौरान सभी शुभ काम पूरी तरह बंद हो जाते हैं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा नहीं है। भादों में कुछ मांगलिक कार्यों पर रोक मानी जाती है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि हर तरह का शुभ काम करना निषिद्ध हो जाता है।

भादों में कौन से काम माने जाते हैं वर्जित?

भाद्रपद का महीना चातुर्मास के दौरान आता है। इस अवधि में धार्मिक परंपराओं के अनुसार विवाह, मुंडन, जनेऊ संस्कार और गृह प्रवेश जैसे प्रमुख मांगलिक संस्कार आमतौर पर नहीं किए जाते।

इसलिए अगले 15 दिनों में ऐसे बड़े मांगलिक आयोजनों से परहेज करने की परंपरा है।

हालांकि, रोजाना की पूजा, धार्मिक अनुष्ठान और भक्ति से जुड़े कार्य किए जा सकते हैं। किसी भी विशेष कार्य के लिए परिवार की परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त देखना उचित माना जाता है।

क्या खरीदारी या नया काम शुरू किया जा सकता है?

भादों में हर प्रकार की खरीदारी या नया काम प्रतिबंधित नहीं माना जाता। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जरूरत के मुताबिक वाहन, संपत्ति या अन्य वस्तुओं की खरीदारी की जा सकती है।

इसी तरह पूजा-पाठ, दान, धार्मिक अनुष्ठान और ईश्वर की आराधना के लिए यह महीना विशेष महत्व रखता है।

भाद्रपद में भगवान श्रीकृष्ण, भगवान गणेश और भगवान शिव की पूजा को विशेष फलदायी माना जाता है।

भादों में खान-पान को लेकर क्यों हैं खास नियम?

भाद्रपद का समय आमतौर पर बारिश के मौसम से जुड़ा होता है। इस दौरान वातावरण में नमी बढ़ने और पाचन तंत्र प्रभावित होने की बात पारंपरिक स्वास्थ्य मान्यताओं में कही गई है।

इसी वजह से इस महीने में खान-पान को लेकर कई धार्मिक और पारंपरिक नियम बताए गए हैं।

दही और छाछ: कई धार्मिक परंपराओं में भादों के दौरान दही, छाछ और उनसे बने खाद्य पदार्थों से परहेज करने की सलाह दी जाती है।
तामसिक भोजन: मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन जैसे खाद्य पदार्थों से दूरी रखने की परंपरा है।
हरी पत्तेदार सब्जियां: कुछ परंपराओं में इस महीने हरी पत्तेदार सब्जियों से भी परहेज बताया गया है।
गुड़: कुछ धार्मिक मान्यताओं में भाद्रपद में गुड़ का सेवन सीमित रखने की सलाह दी जाती है।

इन नियमों को धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ मौसम और पारंपरिक जीवनशैली से भी जोड़ा जाता है।

कृष्ण पक्ष में पड़ेंगे कई बड़े व्रत-त्योहार

भाद्रपद का कृष्ण पक्ष धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान कई प्रमुख व्रत और पर्व आते हैं।

कजरी तीज

कजरी तीज पर सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के लिए व्रत और पूजा करती हैं। कई स्थानों पर इसे विशेष धार्मिक उत्साह के साथ मनाया जाता है।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी

भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर भक्त उपवास रखते हैं और रात में विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।

गोगा नवमी

जन्माष्टमी के अगले दिन कई क्षेत्रों में गोगा नवमी मनाई जाती है। इस दिन लोकदेवता गोगा जी की पूजा करने की परंपरा है।

अजा एकादशी

भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी का व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत से पापों का नाश होता है और व्यक्ति को आध्यात्मिक लाभ मिलता है।

भादों का संदेश क्या है?

भाद्रपद का महीना केवल मांगलिक कार्यों पर रोक लगाने का समय नहीं माना जाता। धार्मिक दृष्टि से यह आत्मसंयम, भक्ति, व्रत, दान और आत्मिक शुद्धि का समय है।

इस दौरान लोग सादगीपूर्ण जीवनशैली अपनाने, सात्विक भोजन करने और भगवान की आराधना में समय देने पर जोर देते हैं।

इसलिए अगर आप भाद्रपद के कृष्ण पक्ष में कोई बड़ा शुभ कार्य करने की योजना बना रहे हैं, तो अपने स्थानीय पंचांग और परिवार की परंपरा के अनुसार शुभ मुहूर्त जरूर देख लें। वहीं पूजा-पाठ, व्रत और धार्मिक साधना जैसे कार्यों के लिए यह अवधि विशेष मानी जाती है।
 

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