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सावन शिवरात्रि पर जल चढ़ाने का शुभ समय, पंडित जी से जानें सही मुहूर्त

सावन शिवरात्रि पर जल चढ़ाने का शुभ समय, पंडित जी से जानें सही मुहूर्त

सावन शिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं और भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। 11 अगस्त 2026 को सावन शिवरात्रि मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

पंडितों के अनुसार सावन शिवरात्रि पर जलाभिषेक के लिए सुबह का समय सबसे शुभ माना जाता है। श्रद्धालु सूर्योदय के बाद स्नान करके भगवान शिव को जल अर्पित कर सकते हैं। इसके अलावा प्रदोष काल और रात्रि में शिव पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है।

सावन शिवरात्रि पर जल चढ़ाने का समय

पंचांग के अनुसार 11 अगस्त को शिवरात्रि तिथि देर रात 1 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। ऐसे में भक्तों के पास दिनभर भगवान शिव की पूजा करने का अवसर रहेगा। सुबह स्नान के बाद शिवलिंग पर गंगाजल या स्वच्छ जल चढ़ाना शुभ माना जाता है।

पंडितों के अनुसार शिवरात्रि के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त के बाद से लेकर दिनभर जलाभिषेक किया जा सकता है। वहीं, रात्रि में शिवरात्रि की पूजा और चार प्रहर का अभिषेक करने की परंपरा भी है।

जलाभिषेक की सही विधि

सावन शिवरात्रि के दिन सबसे पहले भगवान शिव का ध्यान करते हुए पूजा का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद शिवलिंग पर जल अर्पित करें। जल चढ़ाते समय "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।

जलाभिषेक के बाद शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, फूल, अक्षत और चंदन अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद धूप-दीप जलाकर भगवान शिव की आरती करनी चाहिए।

भगवान शिव को क्यों चढ़ाया जाता है जल?

धार्मिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के समय निकले विष को भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण किया था। विष के प्रभाव को शांत करने के लिए देवताओं ने भगवान शिव का जल से अभिषेक किया था। इसी कारण शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा प्रचलित है।

सावन शिवरात्रि के दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान शिव की पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है। भक्तों का विश्वास है कि भोलेनाथ अपने भक्तों की सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर उनकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

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