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28 अगस्त 2026 चंद्र ग्रहण: आसमान में दिखेगा लाल रंग का चंद्रमा, जानें भारत में दिखाई देगा या नहीं और सूतक काल

28 अगस्त 2026 चंद्र ग्रहण: आसमान में दिखेगा लाल रंग का चंद्रमा, जानें भारत में दिखाई देगा या नहीं और सूतक काल

साल 2026 का आखिरी चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को लगने जा रहा है। यह खगोलीय घटना कई मायनों में खास मानी जा रही है, क्योंकि ग्रहण के दौरान चंद्रमा का बड़ा हिस्सा पृथ्वी की छाया में आ जाएगा और कई जगहों पर यह तांबे या सुर्ख लाल रंग का दिखाई दे सकता है। इसी वजह से इसे "ब्लड मून" जैसी खगोलीय घटना से भी जोड़ा जा रहा है।

वैज्ञानिकों के अनुसार यह पूर्ण चंद्र ग्रहण नहीं बल्कि गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। इस दौरान चंद्रमा का लगभग 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया यानी अम्ब्रा में प्रवेश करेगा, जिससे चंद्रमा का रंग लालिमा लिए हुए नजर आ सकता है।

चंद्र ग्रहण कितने बजे लगेगा?

28 अगस्त 2026 को लगने वाला चंद्र ग्रहण भारतीय समय के अनुसार सुबह के समय होगा। ग्रहण की शुरुआत पेनुम्ब्रा चरण से लगभग सुबह 6:54 बजे होगी। इसके बाद आंशिक ग्रहण का चरण सुबह करीब 8:04 बजे शुरू होगा। ग्रहण का सबसे अधिक प्रभाव सुबह 9:43 बजे के आसपास रहेगा और आंशिक ग्रहण का समापन लगभग 11:22 बजे होगा। पूरी प्रक्रिया करीब 5 घंटे 38 मिनट तक चलने वाली है।

क्या भारत में दिखाई देगा चंद्र ग्रहण?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारत के लोग इस अद्भुत खगोलीय घटना को देख पाएंगे। वैज्ञानिकों के अनुसार 28 अगस्त का चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, क्योंकि ग्रहण के समय भारत में दिन का समय होगा और चंद्रमा क्षितिज के नीचे रहेगा।

यह ग्रहण मुख्य रूप से अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। इन क्षेत्रों में लोग लालिमा लिए हुए चंद्रमा का नजारा देख सकेंगे।

भारत में लगेगा सूतक काल या नहीं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण के दौरान सूतक काल का विशेष महत्व माना जाता है। लेकिन ज्योतिषीय परंपराओं में आमतौर पर दिखाई देने वाले ग्रहण के लिए ही सूतक मानने की मान्यता अधिक प्रचलित है। चूंकि 28 अगस्त का चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए कई विद्वानों के अनुसार भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा।

रक्षाबंधन पर पड़ेगा असर?

इस बार चंद्र ग्रहण रक्षाबंधन के दिन पड़ रहा है, इसलिए लोगों में पूजा और राखी बांधने के समय को लेकर चिंता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार भारत में ग्रहण नहीं दिखाई देने के कारण रक्षाबंधन के अनुष्ठानों पर विशेष बाधा नहीं मानी जा रही है। हालांकि अलग-अलग परंपराओं को मानने वाले लोग अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार निर्णय ले सकते हैं।

वैज्ञानिक दृष्टि से क्यों खास है यह ग्रहण?

चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इस दौरान सूर्य की किरणें पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरती हैं और लाल रंग की रोशनी चंद्रमा तक पहुंचती है, जिससे चंद्रमा तांबे जैसा लाल दिखाई दे सकता है।

ध्यान रखें कि ग्रहण से जुड़े धार्मिक नियम आस्था और परंपराओं पर आधारित हैं, जबकि इसकी खगोलीय प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक कारणों से होती है।

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