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Ashadh Month 2026: आषाढ़ मास कब से शुरू? जानें देवशयनी एकादशी, गुप्त नवरात्रि समेत पूरे महीने के प्रमुख व्रत-त्योहार

Ashadh Month 2026: आषाढ़ मास कब से शुरू? जानें देवशयनी एकादशी, गुप्त नवरात्रि समेत पूरे महीने के प्रमुख व्रत-त्योहार

हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह महीना भगवान विष्णु, मां दुर्गा और भगवान शिव की उपासना के लिए शुभ माना जाता है। आषाढ़ मास में गुप्त नवरात्रि, देवशयनी एकादशी, गुरु पूर्णिमा और चातुर्मास जैसे महत्वपूर्ण पर्व आते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी महीने से भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और चातुर्मास का आरंभ होता है।

आइए जानते हैं आषाढ़ मास 2026 के प्रमुख व्रत और त्योहारों के बारे में।

आषाढ़ मास का धार्मिक महत्व

आषाढ़ हिंदू कैलेंडर का चौथा महीना माना जाता है। इस महीने में पूजा-पाठ, जप, तप, दान और आध्यात्मिक साधना का विशेष महत्व बताया गया है। वर्षा ऋतु की शुरुआत के साथ यह महीना धार्मिक अनुष्ठानों और व्रतों के लिए भी जाना जाता है।

आषाढ़ मास 2026 के प्रमुख व्रत और त्योहार

1. आषाढ़ गुप्त नवरात्रि

आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा से गुप्त नवरात्रि का आरंभ होता है। यह नौ दिनों तक चलने वाला विशेष पर्व है, जिसमें मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है। तांत्रिक साधना और शक्ति उपासना के लिए भी इसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

2. विनायक चतुर्थी

आषाढ़ शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन व्रत रखने और गणपति की आराधना करने का विशेष महत्व बताया गया है।

3. स्कंद षष्ठी

भगवान कार्तिकेय को समर्पित यह पर्व आषाढ़ मास में मनाया जाता है। भक्त इस दिन व्रत रखकर भगवान स्कंद की पूजा करते हैं।

4. देवशयनी एकादशी

आषाढ़ शुक्ल एकादशी को देवशयनी एकादशी मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन से भगवान विष्णु चार महीने के लिए क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसी के साथ चातुर्मास का भी आरंभ हो जाता है।

5. चातुर्मास प्रारंभ

देवशयनी एकादशी से चातुर्मास शुरू होता है, जो चार महीनों तक चलता है। इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है। भक्त इस दौरान विशेष नियमों और व्रतों का पालन करते हैं।

6. प्रदोष व्रत

आषाढ़ मास में आने वाला प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए रखा जाता है। इस दिन शिव पूजा और रुद्राभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है।

7. गुरु पूर्णिमा

आषाढ़ पूर्णिमा के दिन गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है। यह पर्व गुरु और शिक्षकों के सम्मान को समर्पित है। महर्षि वेदव्यास की जयंती भी इसी दिन मनाई जाती है, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है।

आषाढ़ मास में क्या करें?

  • भगवान विष्णु, शिव और मां दुर्गा की नियमित पूजा करें।
  • जप, तप और दान-पुण्य के कार्यों में भाग लें।
  • जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करें।
  • धार्मिक ग्रंथों का पाठ और सत्संग करें।
  • सात्विक जीवनशैली अपनाने का प्रयास करें।

क्या न करें?

  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चातुर्मास शुरू होने के बाद बड़े मांगलिक कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है।
  • तामसिक भोजन और नकारात्मक विचारों से दूर रहने का प्रयास करें।

आषाढ़ मास को आध्यात्मिक उन्नति, साधना और भक्ति का महीना माना जाता है। इस दौरान किए गए पूजा-पाठ और दान-पुण्य को विशेष फलदायी बताया गया है।

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