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आखिर क्यों नहीं होती भगवान ब्रह्मा की कहीं पूजा, जानिए विस्तार से

 why is not worship of brahma ji

ज्योतिष न्यूज़ डेस्क: हिंदू धर्म शास्त्रों और ग्रंथों के मुताबिक ब्रह्मा जी ने इस समस्त संसार की रचना की है भगवान श्री हरि विष्णु संसार के पालन कर्ता हैं और महेशा इस जगत का विनाश करते हैं पूरी धरती पर भगवान शिव और विष्णु का तो कई मंदिर ​स्थापित हैं किंतु सृष्टि के रचनाकार ब्रह्मा जी का इस पूरी पृथ्वी पर केवल पुष्कर में ही एक मंदिर है। आखिर क्यों सृष्टि के रचनाकार ब्रह्मा जी का इस संसार में केवल एक ही मंदिर हैं तो आज हम आपको इसी रहस्य के बारे में बता रहे हैं तो आइए जानते हैं। 

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भगवान ब्रह्मा जी का मंदिर पुष्कर में है ऐसा पौराणिक मंदिर, इस दुनिया में और कहीं देखने को नहीं मिलता हैं पुष्कर के इस मंदिर में दुनिया भर के लोग आकर सृष्टि के रचनाकार ब्रह्मा जी की बड़ी श्रद्धा से पूजा करते है। लोग यहां आकर उस भगवान की भक्ति करते हैं जिसकी वजह से आज इस संसार का अस्तित्व हैं।

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पुष्कर का अर्थ होता है वह तालाब जिसका निर्माण पुष्प यानी फूलों से होता हैं इस जगह के बारे में पुराणों में वर्णन है कि एक बार सृष्टिक के रचनाकार ब्रह्मा जी के मन में धरती की भलाई के लिए यज्ञ करने का मन में विचार आया। अब यज्ञ करने के लिए धरती की जरूरत थी। इसके लिए ब्रह्मा ने अपने हाथ के एक कमल को धरती पर यज्ञ करने के लिए जगह ढूंढने भेज दिया। ब्रह्मा जी का भेजा हुआ कमल यज्ञ के लिए धरती ढूंढते ढूंढते पुष्कर शहर जा पहुंचा।

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कमल बिना तालाब के नहीं रह सकता इसलिए इस जगह पर एक तालाब का निर्माण किया गया। फिर उसके बाद ब्रह्मा जी यज्ञ करने के लिए वहां पुष्कर पहुंचे। उनकी पत्नी सावित्री वक्त पर नहीं पहुंच पाई। यह यज्ञ बिना पत्नी के ​किया जा सकता था और यज्ञ शुरू करने का शुभ मुहूर्त ​बीता जा रहा था, इसलिए ब्रह्मा जी ने तत्कालीन वहां के स्थानीय निवासी की एक ग्वाला की बेटी से शादी कर ली और यज्ञ की शुरुआत के लिए बैठ गए। जब ब्रह्मा जी की पत्नी मां सावित्री वहां पहुंची तो अपने स्थान पर किसी और दूसरे को बैठा देख उनका गुस सातवें आसमान पर पहुंच गया। सावित्री क्रोध में आकर अपने ही पति ब्रह्मा जी को श्राप दे दिया, आज के बाद आप की पूजा इस धरती पर कहीं नहीं की जाएगी। यहां का बिताया हुआ जीवन आपको कभी याद नहीं रहेगा। कुछ देर बाद सावित्री का क्रोध शांत हुआ तब उन्होंने कहा कि इस धरती पर केवल आपकी पूजा पुष्कर में ही होगी। 

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