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वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की छत पर लगे कुछ पौधे सिर्फ और सिर्फ मुश्किलें ही बढ़ाते हैं। जानें आखिर घर की छत पर कौन सा पौधा लगाने से बचना चाहिए?

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की छत पर लगे कुछ पौधे सिर्फ और सिर्फ मुश्किलें ही बढ़ाते हैं। जानें आखिर घर की छत पर कौन सा पौधा लगाने से बचना चाहिए?

वास्तु शास्त्र में घर के हर हिस्से को विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता है कि घर में रखी वस्तुओं और लगाए गए पौधों का सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। जिस तरह मुख्य द्वार, रसोई और ब्रह्मस्थान के लिए वास्तु नियम बताए गए हैं, उसी तरह घर की छत पर पौधे लगाने को लेकर भी कुछ मान्यताएं हैं। कहा जाता है कि कुछ पौधों को छत पर लगाने से बचना चाहिए।

छत पर कांटेदार पौधे लगाने से बचें

वास्तु मान्यताओं के अनुसार घर की छत पर कांटेदार पौधे, जैसे कैक्टस और कुछ अन्य कांटेदार प्रजातियां लगाने से बचना चाहिए। माना जाता है कि कांटे घर के वातावरण में तनाव और नकारात्मकता का प्रतीक बन सकते हैं। हालांकि वैज्ञानिक तौर पर पौधों और पारिवारिक परेशानियों के बीच ऐसा कोई प्रमाणित संबंध नहीं है।

सूखे और मुरझाए पौधे न रखें

छत पर पौधे लगाने के बाद उनकी नियमित देखभाल करना बेहद जरूरी है। वास्तु में सूखे, मुरझाए या पूरी तरह खराब हो चुके पौधों को नकारात्मक माना जाता है। इसलिए ऐसे पौधों को समय रहते हटाना या उनकी जगह स्वस्थ पौधे लगाना बेहतर माना जाता है।

बरगद और पीपल को लेकर क्या मान्यता है?

पीपल और बरगद जैसे बड़े पेड़ घर की छत पर गमले में लगाने से बचने की सलाह दी जाती है। इन पेड़ों की जड़ें फैलने वाली होती हैं और लंबे समय में छत या इमारत की संरचना को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए इन्हें घर की छत पर लगाने के बजाय उचित खुली जगह में लगाना अधिक व्यावहारिक है।

छत पर बेल वाले पौधे लगाते समय सावधानी

बहुत तेजी से फैलने वाली बेलों को भी छत पर लगाने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए। यदि बेलें पानी की निकासी या दीवारों के आसपास फैल जाएं तो नमी और रखरखाव से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसलिए पौधे का चयन करते समय उसके आकार और जड़ों के फैलाव को ध्यान में रखना चाहिए।

छत पर कौन से पौधे बेहतर हैं?

यदि आप छत पर गार्डन बनाना चाहते हैं तो तुलसी, एलोवेरा, पुदीना, लेमनग्रास और कुछ छोटे फूलदार पौधे लगाए जा सकते हैं। इन पौधों को पर्याप्त धूप मिलती है और सही गमले व जल निकासी की व्यवस्था के साथ इनकी देखभाल भी आसान होती है।

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