ज्योतिष न्यूज़ डेस्क: सनातन धर्म में वैसे तो कई सारे देवी देवता है इनकी उपासना करने से जीवन के कष्टों से मुक्ति मिल जाती है लेकिन आज हम सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा के जीवन से जुड़ी बातें आपको बता रहे हैं कहा जाता है कि भगवान ब्रह्मा के कुल पांच सिर थे लेकिन एक सिर भगवान शिव ने काट दिया था ऐसे में प्रश्न उठता है कि शिव ने ब्रह्मा का एक सिर क्यों काटा अगर आप भी इसका उत्तर जानना चाहते हैं तो आज हम आपको अपने इस लेख में एक पौराणिक कथा के जरिए इसका उत्तर प्रदान कर रहे है तो आइए जानते है।

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार शिव की माया के भ्रम से प्रभावित होकर ब्रह्मा और विष्णु अपने आप को श्रेष्ठ मानने लगे इस विषय में जब दोनों यह प्रश्न वेदों से पूछा गया तो उनहोंने शिव को ही सर्वश्रेष्ठ बताया लेकिन ब्रह्मा और विष्णु ने उनकी इस बात को नकार दिया तभी एक विशाल तेजपुंज के बीच में एक दिव्य पुरुष की आकृति दिखाई दी।

उसे देखकर ब्रह्मा जी ने कहा हे चंद्रशेखर तुम तो मेरे ही पुत्र हो। इसलिए मेरी शरण में आओ। ब्रह्मा की ऐसी अहंकार पूर्ण बात को सुन शिव क्रोधित हो उठे। उसी वक्त उनकी भृगुटि से काल भैरव प्रकट हुए और ब्रह्मा जी का पांचवां सिर जो अंहकार से पूर्ण था उसे अपनी उंगली के नाखून से काट दिया।

ब्रह्मा का पांचवां सिर काटने से भैरव को ब्रह्मा हत्या का दोष लग गया। शिव के क्रोध से जन्म कालभैरव पर जब ब्रह्महत्या का दोष लग गया तब वे शिव की शरण में पहुंचे और शिव शंकर ने उन्हें ब्रह्म हत्या से छुटकारा पाने के लिए व्रत रखने का आदेश दिया और कहा जब तक यह कन्या यानी ब्रह्महत्या वाराणसी पहुंचेगी तब तुम भयानक रूप धारण करके उससे आगे निकल जाना और उससे पहले काशी पहुंच जाना। काशी में ही आपको ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति मिलेगी। तब चारों ओर घूमते हुए भैरव ने जब मुक्त नगर पुरी काशी में प्रवेश किया उसी समय ब्रह्महत्या पाताल लोक में चली गई और कालभैरव को ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति मिल गई।


