ज्योतिष न्यूज़ डेस्क: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सप्ताह का दूसरा दिन यानी मंगलवार हनुमान पूजा को समर्पित है इस दिन प्रभु राम के भक्त हनुमान की पूजा करना फलदायी होता है शास्त्रों और ग्रंथों में पवनपुत्र हनुमान के जन्म की कथा और बाल लीलाओं की कहानियां तो सभी ने सुनी और पढ़ी है लेकिन इनकी माता अंजनी के जीवन से जुड़ी कथाएं बहुत कम ही लोगों को मालूम है

शास्त्र अनुसार हनुमान जी की तरह ही उनकी माता अंजनी को भी नटखटपन और चंचल स्वभाव के कारण एक ऋषि से श्राप मिला था जिस कारण वह देवलोक की अप्सरा पुंजिकास्थली से वानरी बन गईं तो आज हम आपको अपने इस लेख द्वारा हनुमान जी की माता अंजनी से जुड़ी एक पौराणिक कथा बता रहे हैं तो आइए जानते हैं।

देवलोक की अत्यंत रूपवती अप्सरा थी माता अंजनी—
एक पौराणिक कथा के अनुसार हनुमान जी की माता अंजनी पूर्व जन्म में इंद्र देव की सभा में एक अप्सरा थी। उनका नाम पुंजिकस्थला था वह अत्यंत ही रूपवती और नटखट स्वभाव की थी एक बार उन्होंने अपने चंचल स्वभाव के कारण भूलवश तप कर रहे एक ऋषि के तप में व्यवधान डाल दिया था कथा की मानें तो पुंजिकस्थला ने तप कर रहे ऋषि पर फल फेंक दिया था इससे ऋषि की तपस्या भंग हो गई और वे क्रोधित होकर पुंजिकस्थला को श्राप दे दिया कि जब उन्हें प्रेम होगा तब वह वानरी बन जाएंगी। फिर पुंजिकस्थला ने ऋषिवर से अपनी भूल के लिए क्षमा मांगी।

जिससे ऋषि का ह्रदय पिघल गया लेकिन ऋषि अपना श्राप वापस नहीं ले सकते हैं ते ऐसे में उन्होंने अपने श्राप में कुछ जोड़ते हुए कहा कि तुम्हारा वानरी रूप भी अत्यंत तेजस्वी और आकर्षक होगा। इसके साथ ही ऋषि ने उन्हें एक तेजस्वी पुत्र की माता होने का आशीर्वाद प्रदान किया। जिसकी यश और कीर्ति के कारण पुंजिकस्थला यानी देवी अंजनी का नाम युगों तक जाना जाएगा। कहा जाता है कि ऋषि द्वारा दिए गए श्राप के कारण ही अंजनी को वानरराज केसरी से प्रेम हुआ और ऋषि के आशीर्वाद से उन्हें शिव के अंश के रूप में वीर हनुमान जैसा पुत्र प्राप्त हुआ इसकी यश और कीर्ति का कोई अंत नहीं था और इसी कारण पुंजिकस्थला को हनुमान की माता अंजनी होने का सुख प्राप्त हुआ।


