शी जिनपिंग का अमेरिका दौरा और ट्रंप से मुलाकात, BRICS के बाद बदला कूटनीतिक माहौल?
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सितंबर 2026 में भारत में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने के कुछ ही दिनों बाद अमेरिका के दौरे पर पहुंचे हैं। उनका अमेरिका दौरा 23 से 25 सितंबर तक है, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी अहम मुलाकात हुई। दोनों नेताओं के बीच बातचीत में अमेरिका-चीन संबंधों के साथ-साथ व्यापार, ताइवान और कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई।
इस पूरे घटनाक्रम की खास बात यह है कि शी जिनपिंग ने 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में हुए 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था। वहां उन्होंने BRICS सहयोग, ग्लोबल साउथ और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर चीन का पक्ष रखा था। इसके कुछ ही दिनों बाद उनका अमेरिका दौरा हुआ, जहां दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्ष आमने-सामने बैठे।
ट्रंप ने किया शी जिनपिंग का औपचारिक स्वागत
शी जिनपिंग के अमेरिका पहुंचने पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप ने उनका आधिकारिक स्वागत किया। व्हाइट हाउस के मुताबिक, यह दौरा एक दशक से ज्यादा समय बाद शी जिनपिंग की व्हाइट हाउस यात्रा का अहम अवसर है। 24 सितंबर को दोनों नेताओं के लिए व्हाइट हाउस में स्टेट अराइवल सेरेमनी और स्टेट डिनर भी आयोजित किया गया।
इससे यह संकेत जरूर मिलता है कि अमेरिका और चीन के बीच मतभेदों के बावजूद दोनों देश उच्च स्तर पर बातचीत जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इसे दोनों देशों के बीच सभी विवादों के खत्म होने के तौर पर देखना जल्दबाजी होगी।
BRICS में शी ने क्या कहा था?
नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान शी जिनपिंग ने बहुपक्षीय सहयोग, ग्लोबल साउथ और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में सुधार पर जोर दिया था। चीन की ओर से जारी उनके भाषण में BRICS देशों के बीच सहयोग मजबूत करने और वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक प्रतिनिधित्व वाला बनाने की बात कही गई थी।
भारत में BRICS सम्मेलन के दौरान शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच भी बैठक हुई थी। चीन की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, दोनों नेताओं ने भारत और चीन के संबंधों पर विचारों का आदान-प्रदान किया और दोनों देशों को साझेदार के रूप में आगे बढ़ाने की जरूरत पर चर्चा की।
अमेरिका पहुंचकर किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
ट्रंप और शी की मुलाकात ऐसे समय हुई है जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापार और तकनीक से जुड़े मुद्दों के अलावा ताइवान और कई वैश्विक संकट भी चर्चा में हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, बैठक के एजेंडे में AI, व्यापार और दुर्लभ खनिज जैसे विषय भी शामिल थे।
वहीं, चीन ने अमेरिका के साथ बातचीत में मतभेदों को नियंत्रित करने और सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है। चीन के विदेश मंत्रालय ने शी के दौरे को दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ाने और मतभेदों को सही तरीके से संभालने के प्रयास के रूप में पेश किया है।
पश्चिम एशिया संकट भी बातचीत का हिस्सा
अमेरिका और चीन की बातचीत ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया और यूक्रेन समेत कई क्षेत्रों में गंभीर अंतरराष्ट्रीय संकट बने हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा के मौजूदा सत्र में भी इन संकटों को लेकर वैश्विक नेताओं के बीच चर्चा हो रही है।
BRICS सम्मेलन में चीन ने ग्लोबल साउथ और बहुपक्षीय सहयोग के जरिए अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भूमिका मजबूत करने की बात कही थी। वहीं अमेरिका में ट्रंप प्रशासन अपनी अलग विदेश नीति और अमेरिका की भूमिका पर जोर दे रहा है। ऐसे में ट्रंप-शी मुलाकात को वैश्विक कूटनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या वाकई बदल गया है चीन-अमेरिका का रुख?
शी जिनपिंग के भारत और अमेरिका दौरे के बीच कम समय होने के कारण दोनों घटनाओं की तुलना की जा रही है। लेकिन उपलब्ध बयानों के आधार पर यह कहना कि चीन ने अपना पूरा रुख बदल लिया है, अभी उचित नहीं होगा।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि अमेरिका और चीन अपने मतभेदों के बावजूद शीर्ष स्तर पर बातचीत बनाए हुए हैं। व्यापार, ताइवान, AI, दुर्लभ खनिज और क्षेत्रीय संकट जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के हित कई जगह अलग हैं। इसलिए आने वाले समय में इन वार्ताओं से क्या ठोस नतीजे निकलते हैं, इस पर दुनिया की नजर बनी हुई है।