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अमेरिका में कॉमेडियंस को राष्ट्रपति पर खुलकर बोलने की आजादी क्यों? जानिए क्या है फर्स्ट अमेंडमेंट

 

अमेरिका में लेट नाइट शोज का जबरदस्त क्रेज है। जिमी किमेल, जिमी फॉलन और स्टीफन कोलबर्ट जैसे मशहूर होस्ट अपने शो में राजनीति और अमेरिकी राष्ट्रपति के फैसलों पर खुलकर टिप्पणी करते हैं। कई बार राष्ट्रपति के विवादित फैसलों से लेकर उनके बयानों और निजी जिंदगी तक को कॉमेडी के अंदाज में निशाना बनाया जाता है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी ऐसे कार्यक्रमों और कॉमेडियंस की टिप्पणियों पर कई बार सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दे चुके हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर अमेरिका में कॉमेडियंस और मीडिया को सरकार और राष्ट्रपति पर इतनी तीखी टिप्पणी करने की आजादी मिलती कहां से है?

इसका सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक आधार है अमेरिकी संविधान का फर्स्ट अमेंडमेंट यानी पहला संशोधन।

क्या है अमेरिकी संविधान का फर्स्ट अमेंडमेंट?

अमेरिकी संविधान में फर्स्ट अमेंडमेंट को 1791 में Bill of Rights का हिस्सा बनाया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य सरकार की ओर से नागरिकों की कुछ बुनियादी स्वतंत्रताओं पर मनमाने तरीके से रोक लगाने से बचाना था।

फर्स्ट अमेंडमेंट के तहत अमेरिकी संविधान सरकार को धर्म की स्थापना या किसी धर्म को सरकारी तौर पर बढ़ावा देने से रोकता है। साथ ही लोगों को धर्म की स्वतंत्रता, अपनी बात कहने की आजादी, प्रेस की स्वतंत्रता, शांतिपूर्वक एकत्र होने और सरकार के सामने अपनी शिकायत रखने यानी याचिका देने का अधिकार देता है।

आसान भाषा में समझिए

सीधे शब्दों में कहें तो फर्स्ट अमेंडमेंट अमेरिकी सरकार की शक्ति पर एक संवैधानिक सीमा लगाता है। सरकार किसी व्यक्ति की बोलने की आजादी, प्रेस की स्वतंत्रता, धार्मिक स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा और सरकार से शिकायत करने के अधिकार को मनमाने तरीके से नहीं छीन सकती।

यही वजह है कि अमेरिका में कॉमेडियन, पत्रकार और मीडिया संस्थान राष्ट्रपति समेत बड़े राजनीतिक नेताओं की नीतियों और सार्वजनिक बयानों पर तीखी टिप्पणी कर सकते हैं।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिका में हर तरह की बात पूरी तरह कानूनी है। अमेरिकी अदालतों ने अलग-अलग मामलों में तय किया है कि फ्री स्पीच की संवैधानिक सुरक्षा की सीमाएं क्या हैं।

क्या इसके लिए अमेरिकी नागरिक होना जरूरी है?

फर्स्ट अमेंडमेंट की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इसका लाभ केवल अमेरिकी नागरिकों तक सीमित नहीं माना जाता। अमेरिका में मौजूद लोगों को भी कई परिस्थितियों में इन संवैधानिक स्वतंत्रताओं का संरक्षण मिलता है।

इसके तहत सरकार किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के खिलाफ कोई विचार या संदेश व्यक्त करने के लिए मजबूर करने पर भी संवैधानिक सीमाओं का सामना करती है। इसी तरह सूचना और विचारों तक पहुंच भी अमेरिकी फ्री-स्पीच व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

यानी अमेरिका में फर्स्ट अमेंडमेंट सिर्फ यह अधिकार नहीं देता कि कोई व्यक्ति अपनी बात कह सके, बल्कि यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश करता है कि सरकार अभिव्यक्ति और विचारों के आदान-प्रदान पर मनमाना नियंत्रण न कर सके।

इसी संवैधानिक व्यवस्था की वजह से अमेरिका में राजनीतिक व्यंग्य, कॉमेडी और मीडिया आलोचना को व्यापक कानूनी संरक्षण मिलता है। हालांकि इसकी अपनी सीमाएं हैं और अंतिम तौर पर कई मामलों में यह तय करना अदालतों का काम होता है कि किसी खास बयान या कार्रवाई को संवैधानिक सुरक्षा मिलेगी या नहीं।