ट्रंप के चीन दौरे से पहले वायरल दावे, ‘एयरफोर्स वन हमेशा तैनात रहेगा’ और अजीब प्रोटोकॉल की चर्चाएं, जानें क्या है सच्चाई
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के संभावित चीन दौरे को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के अजीब और बिना पुष्टि वाले दावे तेजी से वायरल हो रहे हैं। इनमें एयरफोर्स वन की तैनाती से लेकर असामान्य सुरक्षा प्रोटोकॉल तक की बातें शामिल हैं। हालांकि, अब तक किसी भी आधिकारिक अमेरिकी या चीनी एजेंसी ने इन दावों की पुष्टि नहीं की है।
इन वायरल पोस्ट्स में दावा किया जा रहा है कि चीन यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था इतनी कड़ी होगी कि “रनवे पर हमेशा एयरफोर्स वन मौजूद रहेगा” और यात्रा से पहले कुछ असामान्य तैयारियां की जा रही हैं। कुछ पोस्ट्स में तो बेहद सनसनीखेज और असत्यापित बातें भी जोड़ी जा रही हैं, जिनका कोई आधिकारिक आधार नहीं है।
सोशल मीडिया पर बढ़ी अफवाहें
पिछले कुछ दिनों में विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर ट्रंप की चीन यात्रा को लेकर कई तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं। इनमें कुछ पोस्ट्स में बिना किसी प्रमाण के यह भी कहा गया कि सुरक्षा एजेंसियां विशेष परिस्थितियों की जांच कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की जानकारियां अक्सर राजनीतिक चर्चाओं के दौरान गलत तरीके से बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत की जाती हैं।
साइबर विश्लेषकों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय नेताओं की यात्राओं के दौरान अफवाहें और फेक न्यूज तेजी से फैलती हैं, खासकर जब मामला अमेरिका और चीन जैसे बड़े देशों से जुड़ा हो।
वास्तविक प्रोटोकॉल क्या होता है?
असल में जब भी कोई पूर्व या मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति विदेश यात्रा करता है, तो सुरक्षा प्रोटोकॉल अत्यंत सख्त होता है। इसमें एयरफोर्स वन की सुरक्षा, सीक्रेट सर्विस की टीम और स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों का समन्वय शामिल होता है। लेकिन “हमेशा रनवे पर विमान खड़ा रहने” जैसे दावे सामान्य प्रोटोकॉल का हिस्सा नहीं होते।
विशेषज्ञ बताते हैं कि एयरफोर्स वन एक अत्यधिक सुरक्षित और मोबाइल कमांड सेंटर होता है, जो राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान आवश्यकतानुसार उपलब्ध रहता है, न कि स्थायी रूप से किसी रनवे पर तैनात।
चीन-अमेरिका संबंधों के बीच संवेदनशीलता
China और अमेरिका के बीच पहले से ही व्यापार, तकनीक और सुरक्षा को लेकर तनावपूर्ण संबंध रहे हैं। ऐसे में किसी भी उच्च स्तरीय यात्रा को लेकर अटकलें और राजनीतिक चर्चाएं बढ़ना आम बात है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इन अटकलों को तथ्य के रूप में लेना गलत होगा।
आधिकारिक पुष्टि का अभाव
अब तक न तो अमेरिकी प्रशासन और न ही चीनी अधिकारियों की ओर से ट्रंप की किसी विशेष यात्रा या उससे जुड़े “असाधारण प्रोटोकॉल” को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है। ऐसे में वायरल दावों को केवल अपुष्ट सोशल मीडिया कंटेंट के रूप में देखा जाना चाहिए।