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पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में खामेनेई की मौत पर हिंसक विरोध, वीडियो में देंखे गिलगित-बाल्टिस्तान में दंगे और गोलीबारी

 

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में ईरान के सुप्रीम लीडर आयातुल्लाह खामेनेई की मौत के विरोध में सोमवार को विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप ले लिया। गिलगित-बाल्टिस्तान में प्रदर्शनकारियों ने बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरकर जमकर तोड़-फोड़ की। प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय यूनाइटेड नेशंस (UN) कार्यालय में आग लगा दी, जिसमें गिलगित में UN डेवलपमेंट प्रोग्राम (UNDP) का ऑफिस भी शामिल था।

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इसके अलावा, स्कर्दू में पुलिस अधिकारियों के कार्यालय और कई सरकारी इमारतों में भी आग लगाई गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों की फायरिंग की वजह से कम से कम सात लोग मारे गए और 12 से अधिक घायल हुए हैं। घायलों में कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना के बाद स्थानीय अस्पतालों में इमरजेंसी घोषित कर दी गई है और गिलगित-बाल्टिस्तान के प्रमुख शहरों में सुरक्षा को हाईअलर्ट पर रखा गया है।

स्थानीय प्रशासन ने बताया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारी कानून और व्यवस्था की सीमा पार कर गए थे। कई प्रदर्शनकारी सरकारी और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे थे। गिलगित और स्कर्दू में सुरक्षा बलों ने लोगों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और कड़ी कार्रवाई का सहारा लिया, लेकिन इससे भी हिंसा पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका।

यह हिंसक घटनाक्रम रविवार से शुरू हुआ, जब पाकिस्तान के कराची में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर भी खामेनेई की मौत के विरोध में प्रदर्शन हुए। कराची में प्रदर्शनकारियों ने दूतावास में घुसपैठ करने की कोशिश की, जिसके जवाब में दूतावास के अंदर से सुरक्षा कर्मियों ने गोलीबारी की। इन घटनाओं के बाद अब तक पाकिस्तान में कुल 23 लोगों की मौत हो चुकी है और कई दर्जन लोग घायल हुए हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि खामेनेई की मौत पर प्रतिक्रिया केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं रही है। यह प्रदर्शन धार्मिक और राजनीतिक भावनाओं के ज्वलंत मिश्रण को दिखाते हैं। इस क्षेत्र में लंबे समय से अस्थिर राजनीतिक स्थिति के चलते छोटी घटनाएं भी बड़े दंगे और हिंसा का रूप ले सकती हैं।

स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से संयम बनाए रखने और आवश्यक सुरक्षा उपायों का पालन करने का आह्वान किया है। गिलगित-बाल्टिस्तान में फोर्सेज की तैनाती बढ़ा दी गई है और कई सड़कों को बंद कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि हिंसा को जल्द काबू में लाने के लिए कड़ी कार्रवाई की जा रही है।

इससे पहले भी पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में ईरान के नेताओं या धार्मिक घटनाओं के विरोध में हिंसक प्रदर्शन होते रहे हैं। हाल के घटनाक्रम ने फिर से यह दिखा दिया है कि इस क्षेत्र में सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता पर तनाव का असर बहुत गहरा है।

इस तरह, पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में खामेनेई की मौत के विरोध में हिंसा और बर्बरता बढ़ती जा रही है। गिलगित और स्कर्दू में सरकारी और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं पर हमलों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बल पूरी तरह सतर्क हैं, लेकिन नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता अभी भी बनी हुई है।