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इटली में हिंसक प्रदर्शन करने पर 5 साल की जेल, 21 लाख रुपये तक जुर्माना; वीडियो में जाने नाबालिगों के नुकसान की भरपाई करेंगे माता-पिता

 

इटली में हिंसक प्रदर्शन, लूटपाट और आगजनी करने वालों के खिलाफ सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने मंगलवार, 20 अक्टूबर को सुरक्षा से जुड़े नए नियमों को मंजूरी दी। इसके तहत हिंसक प्रदर्शन में शामिल लोगों को अधिकतम 5 साल तक की जेल और 20 हजार यूरो (करीब 21 लाख रुपये) तक का जुर्माना हो सकता है। सरकार ने नाबालिगों की ओर से किए गए नुकसान की भरपाई उनके माता-पिता से कराने और 14 साल से अधिक उम्र के बच्चों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई आसान बनाने का भी फैसला किया है। इसके अलावा, मिलान में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए साल के अंत तक 500 अतिरिक्त सैनिक तैनात किए जाएंगे। 

मिलान में हिंसा और लूटपाट के बाद सरकार का फैसला

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इटली के मिलान में 17 अक्टूबर को महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत के खिलाफ प्रदर्शन हुआ था। शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन बाद में कुछ प्रदर्शनकारियों ने हिंसा, दुकानों में लूटपाट और तोड़फोड़ शुरू कर दी। कई जगह आगजनी की घटनाएं भी सामने आईं। इसके बाद मिलान के अलावा ट्यूरिन और बोलोन्या जैसे शहरों में भी हिंसक घटनाएं हुईं।पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। अधिकारियों के मुताबिक, दो दिनों के दौरान बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी घायल हुए और कई लोगों को हिरासत में लिया गया। हिंसा के बाद सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की और नए नियमों को मंजूरी दी। 

हिंसक प्रदर्शन करने वालों पर क्या कार्रवाई होगी?

नई व्यवस्था के तहत सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान हिंसक गतिविधियों में शामिल होने को अलग अपराध बनाया गया है। यदि पांच या उससे अधिक लोगों का समूह प्रदर्शन के दौरान पत्थर, पटाखे, डंडे या अन्य खतरनाक वस्तुओं का इस्तेमाल करके लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालता है, तो दोषियों को 2 से 5 साल तक की जेल हो सकती है।इसके साथ ही अधिकतम 20 हजार यूरो यानी करीब 21 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। यदि आरोपी ने चेहरा ढका हुआ था या घटना में किसी व्यक्ति को चोट पहुंची, तो सजा और कड़ी हो सकती है।सरकार का कहना है कि विरोध प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन हिंसा, चोरी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने को प्रदर्शन के नाम पर जायज नहीं ठहराया जा सकता। 

बच्चों के नुकसान की भरपाई करेंगे माता-पिता

नए नियमों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा नाबालिगों की ओर से की गई तोड़फोड़ और नुकसान से जुड़ा है। यदि कोई बच्चा हिंसक गतिविधि में शामिल होकर सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है, तो उसके माता-पिता को उसकी भरपाई करनी पड़ सकती है।उदाहरण के तौर पर, यदि किसी नाबालिग ने बस स्टॉप, ट्रैफिक सिग्नल, पुलिस वाहन, दुकान की खिड़की या किसी कार को नुकसान पहुंचाया, तो संबंधित अधिकारियों या संपत्ति के मालिक की ओर से मुआवजे की मांग की जा सकती है।प्रधानमंत्री मेलोनी ने इस नीति को समझाते हुए कहा कि नुकसान करने वाले को उसकी कीमत चुकानी चाहिए और यदि नुकसान करने वाला नाबालिग है, तो उसके माता-पिता को जिम्मेदारी उठानी होगी।

14 साल से अधिक उम्र के बच्चों पर कार्रवाई आसान

सरकार ने किशोरों से जुड़े मामलों में कानूनी कार्रवाई को भी सख्त बनाने का फैसला किया है। नए प्रावधानों के तहत 14 से 18 साल की उम्र के किशोरों को अपने कृत्यों की जिम्मेदारी समझने में सक्षम माना जाएगा, जब तक कि इसके विपरीत साबित न हो।इससे पहले किसी नाबालिग की आपराधिक जिम्मेदारी तय करने के लिए उसकी समझ और परिपक्वता का आकलन महत्वपूर्ण होता था। नए नियमों के तहत पुलिस को कुछ मामलों में CCTV फुटेज और दूसरे सबूतों के आधार पर बाद में गिरफ्तारी करने की भी अधिक गुंजाइश मिलेगी।सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य हिंसक गतिविधियों में शामिल युवाओं पर प्रभावी कार्रवाई करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना है। 

मिलान में तैनात होंगे 500 अतिरिक्त सैनिक

हिंसा की घटनाओं के बाद मिलान में सुरक्षा बढ़ाने के लिए साल के अंत तक 500 अतिरिक्त सैनिक तैनात किए जाएंगे। ये सैनिक महत्वपूर्ण स्थानों की सुरक्षा और निगरानी में मदद करेंगे।सरकार ने किशोर न्याय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त न्यायिक संसाधन और हिरासत केंद्रों में सुविधाएं बढ़ाने की भी बात कही है।हालांकि, नए नियमों को लेकर यह बहस भी उठ रही है कि सख्त सजा से हिंसा पर कितनी प्रभावी रोक लगेगी और क्या सरकार को युवाओं की आर्थिक परेशानियों पर भी ध्यान देना चाहिए।

मेलोनी ने कहा- युवाओं का हिंसा में शामिल होना डराने वाला

प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में कहा कि हिंसक घटनाओं में बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी दुखद और डराने वाली है।उन्होंने कहा कि 17 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन में कई युवा चीजें तोड़ने, चोरी करने और इन गतिविधियों के वीडियो बनाने के लिए आए थे। मेलोनी के मुताबिक, इस समस्या से गंभीरता से निपटना जरूरी है, ताकि हिंसा के वीडियो देखकर दूसरे युवा भी ऐसा करने के लिए प्रेरित न हों।सरकार ने साफ किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और लोकतांत्रिक असहमति पर रोक लगाना उसका उद्देश्य नहीं है। कार्रवाई का लक्ष्य हिंसा, लूटपाट और सार्वजनिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियां हैं।नए सुरक्षा नियमों के लागू होने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इनका इस्तेमाल किस तरह किया जाता है और क्या इनसे मिलान समेत दूसरे शहरों में हिंसा की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण हो पाता है।