पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में फिर भड़की हिंसा, रावलकोट में सेना के ऑपरेशन से मचा हड़कंप; 7 लोगों की मौत का दावा
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। रावलकोट में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बाद हालात गंभीर होने की खबरें सामने आ रही हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने कथित सैन्य हिंसा में मारे गए लोगों के शवों को प्रदर्शन स्थलों पर रखकर विरोध जताया। इस दौरान हजारों की संख्या में लोग जमा हुए और 'इंकलाब' के नारे लगाए।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बल उनके आंदोलन को दबाने के लिए ताकत का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं, पाकिस्तान की ओर से पहले भी प्रदर्शनकारियों पर हिंसा और सुरक्षाकर्मियों पर हमले के आरोप लगाए जाते रहे हैं। ऐसे में क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।
रावलकोट में सुबह शुरू हुआ सुरक्षा बलों का अभियान
रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार सुबह करीब 8 बजे रावलकोट में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शन के प्रमुख ठिकानों की ओर अभियान शुरू किया। इस कार्रवाई में पाकिस्तानी रेंजर्स और फ्रंटियर कॉर्प्स के जवान स्थानीय पुलिस के साथ शामिल बताए गए हैं।
दावा किया गया है कि सुरक्षा बलों के प्रदर्शन स्थलों की ओर बढ़ने के दौरान हवा में गोलीबारी भी हुई। बताया जा रहा है कि 9 जून से रावलकोट बस टर्मिनल पर 5,000 से अधिक लोग धरने पर बैठे थे। ये प्रदर्शनकारी अपनी 38 सूत्रीय मांगों को लागू करने की मांग कर रहे थे।
ऑपरेशन के दौरान 7 नागरिकों की मौत का दावा
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अभियान के शुरुआती दो घंटों यानी सुबह 8 बजे से 10 बजे के बीच कम से कम 7 आम नागरिकों की मौत हुई और 23 अन्य घायल हो गए। इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
कुछ रिपोर्टों में यह भी आरोप लगाया गया है कि कार्रवाई के दौरान ड्रोन का इस्तेमाल किया गया और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया। एक हमले में स्थानीय निवासी वसीम शकील का घर नष्ट होने की बात भी कही गई है।
उमर फारूक चौक के आसपास भी तनाव और झड़पें जारी रहने की खबर है। बताया जा रहा है कि इस इलाके में हजारों प्रदर्शनकारी जमा हुए थे। इसी बीच मस्जिदों के लाउडस्पीकरों से लोगों को एकत्र होने और सुरक्षा बलों की कार्रवाई का विरोध करने की अपील किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
शवों को प्रदर्शन स्थल पर रखकर जताया विरोध
इस घटना के बाद प्रदर्शनकारियों का गुस्सा और बढ़ गया। रिपोर्टों के मुताबिक, नागरिकों ने हिंसा में मारे गए लोगों के शवों को प्रदर्शन स्थलों पर रखकर विरोध जताया। शवों के आसपास बड़ी संख्या में लोग जमा हुए और नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे अपने अधिकारों और मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं। हालांकि, घटनास्थल की स्थिति और मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
आखिर रावलकोट में क्यों हो रहा है विरोध प्रदर्शन?
रावलकोट में जारी आंदोलन का संबंध जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी (JAAC) से जुड़े विरोध-प्रदर्शनों से बताया जा रहा है। यह कमिटी लंबे समय से राजनीतिक प्रतिनिधित्व, आर्थिक अधिकारों और सरकारी अधिकारियों द्वारा किए गए वादों को लागू करने की मांग उठा रही है।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में क्षेत्र के लोगों को अधिक अधिकार और प्रशासनिक फैसलों में उचित भागीदारी देना शामिल है। कमिटी से जुड़े लोगों ने आरोप लगाया है कि उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा और आंदोलन को दबाने के लिए जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया जा रहा है।
दूसरी तरफ, पाकिस्तानी अधिकारियों ने पहले JAAC और उसके समर्थकों पर हिंसा करने तथा सुरक्षाकर्मियों पर हमले के आरोप लगाए हैं। इसी विरोध और आरोप-प्रत्यारोप के बीच इलाके में तनाव बना हुआ है।
पहले भी हो चुकी हैं प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें
PoJK में यह पहली बार नहीं है जब आंदोलन के दौरान हिंसा की खबर सामने आई हो। रॉयटर्स की पूर्व रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में सुरक्षा बलों और JAAC समर्थकों के बीच हुई झड़पों में नौ लोगों की मौत हुई थी।
उस समय तनाव JAAC के प्रस्तावित मार्च और क्षेत्र की चुनावी व्यवस्थाओं के विरोध को लेकर बढ़ा था। इसके बाद भी इलाके में विरोध-प्रदर्शन और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बनी रही।
संचार सेवाओं पर भी लगाई गईं पाबंदियां
लगातार जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच क्षेत्र में संचार सेवाओं पर पाबंदियां लगाए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। ऐसी स्थिति में स्थानीय लोगों के लिए घटनाओं की जानकारी साझा करना और बाहरी दुनिया तक अपनी बात पहुंचाना मुश्किल हो सकता है।
फिलहाल रावलकोट में सुरक्षा बलों की कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों के आरोप और कथित मौतों को लेकर स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। मृतकों और घायलों की वास्तविक संख्या, अभियान के दौरान इस्तेमाल किए गए तरीकों और पूरे घटनाक्रम पर आधिकारिक तथा स्वतंत्र पुष्टि का इंतजार है।