USS जॉर्ज वॉशिंगटन ने पश्चिम एशिया में संभाली कमान, वीडियो में जाने 250 दिन से तैनात USS अब्राहम लिंकन की जगह पहुंचा
अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपनी नौसैनिक तैनाती में बड़ा बदलाव किया है। अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS जॉर्ज वॉशिंगटन ने गुरुवार से पश्चिम एशिया में ऑपरेशन शुरू कर दिया है। वह करीब 250 दिनों से इस क्षेत्र में तैनात USS अब्राहम लिंकन की जगह पहुंचा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इसकी जानकारी दी है। जॉर्ज वॉशिंगटन की तैनाती ऐसे समय हुई है, जब ईरान को लेकर पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है।
USS अब्राहम लिंकन लंबे समय से पश्चिम एशिया में तैनात था। इस पर तैनात अमेरिकी सैनिक लगातार लंबे समय तक ड्यूटी कर रहे थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ सैनिकों ने जहाज पर खराब शौचालय, फफूंद लगे शॉवर और दूषित पानी जैसी समस्याओं की शिकायत की थी। कुछ सैनिकों की तबीयत खराब होने की खबर भी सामने आई थी। इसके बाद उनके परिवारों ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता जताई थी।
जॉर्ज वॉशिंगटन पहले साउथ चाइना सी में था तैनात
USS जॉर्ज वॉशिंगटन इससे पहले साउथ चाइना सी में अमेरिकी नौसैनिक मौजूदगी का हिस्सा था। अब इसके अरब सागर की ओर चले जाने के बाद इस क्षेत्र में अमेरिका का कोई एयरक्राफ्ट कैरियर मौजूद नहीं है। साउथ चाइना सी अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण इलाका माना जाता है।इस समुद्री क्षेत्र के आसपास चीन, ताइवान, फिलीपींस और वियतनाम जैसे देश स्थित हैं। दुनिया के कई महत्वपूर्ण व्यापारिक समुद्री मार्ग भी इसी क्षेत्र से होकर गुजरते हैं। चीन साउथ चाइना सी के बड़े हिस्से पर अपना दावा करता है, जिसे लेकर उसका कई देशों के साथ विवाद रहा है।
अमेरिका की सैन्य ताकत पर असर
जॉर्ज वॉशिंगटन के साउथ चाइना सी से हटने के बाद इस इलाके में अमेरिका की तत्काल नौसैनिक ताकत कम हो गई है। ऐसे में यदि अचानक कोई संकट पैदा होता है या चीन के साथ तनाव बढ़ता है तो अमेरिका को अपनी एयरक्राफ्ट कैरियर क्षमता को इस क्षेत्र में दोबारा तैनात करने में अधिक समय लग सकता है।अमेरिका लंबे समय से साउथ चाइना सी में अपने नौसैनिक अभियानों के जरिए क्षेत्र में मौजूदगी बनाए रखता रहा है। इसका उद्देश्य समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ सुरक्षा संबंधों को मजबूत करना है। वहीं, चीन इस क्षेत्र में अपनी सैन्य और नौसैनिक गतिविधियां लगातार बढ़ाता रहा है।
ईरान तनाव के बीच पश्चिम एशिया पर फोकस
जॉर्ज वॉशिंगटन की पश्चिम एशिया में तैनाती से साफ है कि इस समय अमेरिकी नौसेना का रणनीतिक फोकस क्षेत्र में मौजूद तनाव पर है। ईरान को लेकर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के बीच लगातार तनाव बना हुआ है। ऐसे में एयरक्राफ्ट कैरियर की मौजूदगी अमेरिका को क्षेत्र में हवाई और समुद्री अभियानों के लिए अतिरिक्त क्षमता देती है। USS अब्राहम लिंकन की जगह जॉर्ज वॉशिंगटन के पहुंचने से अमेरिकी नौसेना की पश्चिम एशिया में तैनाती बनी रहेगी, लेकिन साउथ चाइना सी से एयरक्राफ्ट कैरियर की अनुपस्थिति को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी नौसैनिक मौजूदगी को कब और किस तरह दोबारा मजबूत करता है।