पेशावर में अमेरिका-पाकिस्तान का सैन्य अभ्यास! मुनीर से बढ़ी दोस्ती और मोदी से दूरी, जाने भारत पर क्या होगा असर
टैरिफ को लेकर भारत के साथ चल रहे तनाव के बीच, अमेरिकी सैनिकों का एक दस्ता पाकिस्तान पहुंचा है। अमेरिकी सैनिकों को पेशावर के पास पब्बी ले जाया गया। पब्बी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक तहसील (उप-विभाग) है, जो पेशावर के पास और अफगानिस्तान सीमा के भी करीब है। अफगान तालिबान ने भी चिंता जताई है कि पाकिस्तान ने अमेरिका को अफगानिस्तान की निगरानी के लिए अपने एयरस्पेस का इस्तेमाल करने की इजाज़त दी है। पाकिस्तानी सेना की प्रोपेगेंडा विंग, इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) ने बताया कि अमेरिकी सैनिक एक जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज के लिए पाकिस्तान आए हैं।
पाकिस्तानी सेना ने क्या कहा
ISPR ने बताया कि अमेरिकी सैनिक 'इंस्पायर्ड गैम्बिट 2026' नाम की एक जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज के लिए पाकिस्तान आए हैं। यह एक्सरसाइज पाकिस्तान और अमेरिका के बीच इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाने और आतंकवाद विरोधी विशेषज्ञता साझा करने के लिए की जा रही है। पब्बी में हुई यह एक्सरसाइज इंस्पायर्ड गैम्बिट 2026 का 13वां एडिशन है। ISPR के अनुसार, दो हफ़्ते की इस एक्सरसाइज में पाकिस्तानी और अमेरिकी दोनों सेनाओं के दस्ते शामिल हैं। दोनों पक्षों के अधिकारियों ने उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान के पब्बी में नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर में उद्घाटन समारोह में हिस्सा लिया।
पाकिस्तान-अमेरिका मिलिट्री एक्सरसाइज का मकसद क्या है?
बयान में कहा गया है कि अमेरिका-पाकिस्तान मिलिट्री एक्सरसाइज का मकसद आतंकवाद विरोधी अनुभवों को साझा करके आपसी समझ और इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाना है। इसका मकसद प्रभावी आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए ज़रूरी रणनीतियों, तकनीकों और प्रक्रियाओं को और बेहतर बनाना भी है। ISPR ने कहा, "शहरी युद्ध के दौरान निशानेबाजी कौशल पर ज़ोर दिया जा रहा है, साथ ही एक-दूसरे के ऑपरेशनल सिद्धांतों और बेहतरीन तरीकों को समझने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।"
पाकिस्तान-अमेरिका संबंध मज़बूत हुए
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संबंध मज़बूत हुए हैं। दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग पहले से ही चल रहा था, और अब आर्थिक संबंध भी मज़बूत हो रहे हैं। कई अमेरिकी कंपनियाँ पाकिस्तान में तेल की खोज और उत्पादन में हिस्सा लेने में दिलचस्पी रखती हैं। इसके अलावा, पाकिस्तान और अमेरिका क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े मामलों पर भी सहयोग कर रहे हैं। ट्रंप प्रशासन अफगानिस्तान में हाल के घटनाक्रमों के कारण इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बनाए रखने के लिए पाकिस्तान को ज़्यादा महत्व दे रहा है।