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ईरान पर फिर बरसा अमेरिका, सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक; वीडियो में जाने जवाबी हमले का ईरान का दावा, मिडिल ईस्ट में बढ़ा युद्ध का खतरा

 

मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार गहराता जा रहा है। गुरुवार तड़के अमेरिका ने एक बार फिर ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, इस कार्रवाई में मिसाइल लॉन्च साइट, रक्षा प्रतिष्ठानों और सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित 388वीं ब्रिगेड की बैरक को निशाना बनाया गया। अमेरिका का कहना है कि यह हमला क्षेत्र में अपने हितों और सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया।

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अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए गए। हालांकि, इन हमलों से हुए नुकसान को लेकर स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

बहरीन और कुवैत में हाई अलर्ट

ईरान के जवाबी हमले के दावे के बाद बहरीन और कुवैत में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं। दोनों देशों में मिसाइल अलर्ट जारी कर दिया गया, जिसके बाद सैन्य ठिकानों और रणनीतिक इलाकों की सुरक्षा बढ़ा दी गई। नागरिकों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

वहीं जॉर्डन की सेना ने दावा किया कि उसने अपने हवाई क्षेत्र की ओर बढ़ रही ईरान की आठ मिसाइलों को समय रहते मार गिराया। अधिकारियों का कहना है कि एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह सक्रिय है और किसी भी खतरे से निपटने के लिए तैयार है।

ईरान की अमेरिका को खुली चेतावनी

इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटता, तो ईरान बड़े सैन्य टकराव के लिए पूरी तरह तैयार है। उनका कहना था कि ईरान अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा।

तेल और गैस निर्यात रोकने की चेतावनी

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने भी कड़ा बयान जारी किया है। संगठन ने कहा कि यदि हालात और बिगड़ते हैं, तो मिडिल ईस्ट से तेल और गैस के निर्यात को प्रभावित करने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं। इस बयान के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस आपूर्ति केंद्रों में शामिल है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है। इसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है।

बढ़ता तनाव, दुनिया की बढ़ी चिंता

अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे मिडिल ईस्ट को एक बार फिर अस्थिरता के दौर में ला खड़ा किया है। क्षेत्रीय देशों ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील कर रहा है।

फिलहाल हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई का यह सिलसिला जारी रहता है, तो इसका असर केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।