☰
×

US-Russia Sanctions: रूस पर नए प्रतिबंधों से पहले 60 दिन रुकेगा अमेरिका, भारत पर 100% टैरिफ का खतरा भी टला?

 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का प्रशासन रूस पर नए प्रतिबंध लगाने से पहले 60 दिनों तक उनके संभावित असर का आकलन करेगा। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के मुताबिक, रूस से ऊर्जा खरीदने वाले भारत जैसे देशों पर कड़े प्रतिबंध लगाने से वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है। ऐसे में अमेरिका को फैसला लेने से पहले ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखना होगा।

रूस पर प्रतिबंधों को लेकर 60 दिन का विराम क्यों?

मार्को रुबियो ने शनिवार को कहा कि रूस पर व्यापक प्रतिबंध लगाने से पहले उनके संभावित प्रभावों का अध्ययन करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पहले से ही कई संघर्षों के कारण दबाव में है।

रुबियो ने यूक्रेन युद्ध, ईरान से जुड़े संघर्ष और सऊदी अरब पर हूती हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि इन घटनाओं ने ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों में अस्थिरता बढ़ाई है। उन्होंने संकेत दिया कि प्रतिबंधों से जुड़ी नीतियों में बदलाव करते समय इन सभी परिस्थितियों का आकलन करना होगा।

रुबियो उज्बेकिस्तान और भारत की यात्रा से पहले यह बयान दे रहे थे। उनके मुताबिक, प्रतिबंधों से जुड़े प्रस्ताव में छूट का प्रावधान रखने के पीछे भी यही सोच थी कि फैसले के आर्थिक नतीजों को समझने के लिए समय मिल सके।

भारत पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान

रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर दबाव बनाने के लिए अमेरिकी संसद में प्रस्तावित लिंडसे ग्राहम एक्ट चर्चा में है। दिए गए विवरण के मुताबिक, इसके प्रावधान अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी ऊर्जा के बड़े खरीदारों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार दे सकते हैं।

इसका असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ सकता है, जो रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा खरीदते हैं। हालांकि, किसी देश पर टैरिफ लगाने का वास्तविक फैसला अमेरिकी प्रशासन की कार्रवाई और संबंधित कानून के लागू प्रावधानों पर निर्भर करेगा।

रुबियो ने कहा कि भारत जैसे देशों ने अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश की है, लेकिन रूस से खरीद पूरी तरह बंद करना आसान नहीं है। ऊर्जा आपूर्ति में अचानक बदलाव से लागत और बाजार पर असर पड़ सकता है।

तेल की कीमतों पर क्यों पड़ सकता है असर?

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर केवल ईरान या होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी परिस्थितियों का ही प्रभाव नहीं पड़ता। रूस-यूक्रेन युद्ध और सऊदी अरब पर हूती हमलों के कारण भी ऊर्जा ढांचे और आपूर्ति पर दबाव पड़ रहा है।

ऐसे हालात में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ सकता है। अमेरिका इसी संभावित प्रभाव को समझने के लिए प्रतिबंधों से जुड़े विकल्पों का आकलन करना चाहता है।

अमेरिका को घरेलू ऊर्जा कीमतों की भी चिंता

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रतिबंधों में छूट देने के पीछे अमेरिका में ऊर्जा की कीमतों को नियंत्रित रखने की चिंता भी एक कारण है। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव 3 नवंबर को होने हैं और घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतें राजनीतिक रूप से अहम मुद्दा बनी हुई हैं।

हालांकि, रूस से ऊर्जा खरीद पर प्रतिबंधों में किसी भी तरह की राहत का उद्देश्य और उसका प्रभाव आधिकारिक फैसलों तथा उनके लागू होने की शर्तों से ही स्पष्ट होगा।

अमेरिका-रूस ऊर्जा समझौते को लेकर भी चर्चा

रिपोर्ट में रूस के साथ डीजल आपूर्ति से जुड़े एक समझौते का भी उल्लेख किया गया है। इसमें दावा किया गया है कि आने वाले महीनों में मॉस्को अमेरिका और वैश्विक बाजार को बड़ी मात्रा में डीजल की आपूर्ति कर सकता है।

इस तरह के किसी समझौते की शर्तों, मात्रा और वास्तविक स्थिति की पुष्टि आधिकारिक दस्तावेजों से करना जरूरी है।

भारत के लिए क्या मायने हैं?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। रूस से तेल खरीद पर कड़े अमेरिकी प्रतिबंध या अतिरिक्त टैरिफ लागू होने की स्थिति में भारत की ऊर्जा लागत, व्यापार और कूटनीतिक संबंध प्रभावित हो सकते हैं।

फिलहाल रुबियो के बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिकी प्रशासन प्रतिबंधों से जुड़े फैसले लेते समय आर्थिक प्रभावों और ऊर्जा आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने पर विचार कर रहा है। हालांकि, 60 दिनों के विराम और भारत पर संभावित टैरिफ की स्थिति को लेकर अंतिम निष्कर्ष से पहले संबंधित कानून और अमेरिकी प्रशासन की आधिकारिक घोषणा की पुष्टि जरूरी है।