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US-Russia Sanctions: भारत पर 100% टैरिफ के प्रस्ताव से मचा घमासान, अमेरिकी संसद में आए कई संशोधन
 

 

रूस के खिलाफ प्रस्तावित अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर वॉशिंगटन में अब बहस तेज हो गई है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में उस विधेयक में कई बदलावों के प्रस्ताव सामने आए हैं, जिसके तहत रूस और उसके कारोबारी साझेदार देशों पर सख्त आर्थिक कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। इन प्रस्तावित संशोधनों में भारत का नाम भी प्रमुखता से शामिल किया गया है।
वहीं, एक अन्य संशोधन में रूस के साथ कारोबार करने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने वाले प्रावधान को ही हटाने की मांग की गई है। ऐसे में अमेरिकी संसद में इस विधेयक को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है।
क्या है रूस प्रतिबंध विधेयक?
‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act’ को अमेरिकी सीनेट ने अगस्त में 86-11 के भारी बहुमत से पारित किया था। प्रस्तावित कानून में रूस के नेतृत्व और ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंधों को मजबूत करने की बात कही गई है।
इसके अलावा रूस द्वारा तेल निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले जहाजों के खिलाफ कार्रवाई का भी प्रावधान है। ऐसे जहाजों के समूह को आम तौर पर रूस के ‘शैडो फ्लीट’ के तौर पर संदर्भित किया जाता है।


भारत समेत 10 देशों को स्पष्ट रूप से जोड़ने का प्रस्ताव
प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक सांसद स्टेनी होयर की ओर से एक संशोधन पेश किया गया है। इसमें उन देशों के नाम स्पष्ट रूप से कानून में शामिल करने की मांग की गई है, जिन पर रूस के साथ तेल कारोबार करने के कारण प्रस्तावित 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया जा सकता है।
इस सूची में भारत, चीन, तुर्किये, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाकिया, यूएई, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिज रिपब्लिक का नाम शामिल करने का प्रस्ताव है।
अगर ऐसा संशोधन कानून का हिस्सा बनता है, तो रूस से तेल कारोबार करने वाले इन देशों को प्रस्तावित माध्यमिक टैरिफ के दायरे में स्पष्ट रूप से रखा जा सकता है।


दूसरा संशोधन टैरिफ प्रावधान हटाने के पक्ष में
दूसरी ओर, डेमोक्रेटिक सांसद ग्रेगरी मीक्स ने बिल्कुल अलग रुख अपनाया है। उन्होंने विधेयक की धारा 113 को हटाने का प्रस्ताव दिया है।
यही धारा अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस के व्यापारिक साझेदारों पर व्यापक माध्यमिक टैरिफ लगाने का अधिकार देने से जुड़ी है। मीक्स इस तरह के अतिरिक्त टैरिफ अधिकार के विरोध में हैं। उनके प्रस्ताव को तीन अन्य सांसदों का समर्थन भी मिला है।
इससे साफ है कि प्रतिनिधि सभा में रूस के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाने को लेकर सांसदों के बीच एक राय नहीं है।


रूस के तेल कारोबार पर अमेरिका की नजर
अमेरिका का तर्क है कि रूस की तेल बिक्री से होने वाली आय यूक्रेन के खिलाफ उसके युद्ध को आर्थिक आधार देती है। इसी वजह से प्रस्तावित कानून में रूस के प्रमुख तेल खरीदार देशों पर दबाव बढ़ाने की कोशिश की गई है।
सीनेट से पारित मूल विधेयक में देशों के नाम सीधे तौर पर शामिल नहीं किए गए थे। इसमें रूस से तेल और गैस आयात की मात्रा के आधार पर प्रमुख खरीदार देशों को टैरिफ के संभावित दायरे में रखने का प्रावधान है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर छूट का प्रस्ताव
ग्रेगरी मीक्स ने एक अन्य संशोधन के जरिए राष्ट्रपति को प्रतिबंधों से अस्थायी छूट देने की शक्ति देने का प्रस्ताव भी रखा है। इसके तहत राष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरत होने पर किसी विदेशी व्यक्ति पर लगाए गए प्रतिबंधों से 90 दिनों तक छूट दी जा सकेगी।
जरूरत पड़ने पर इस छूट को आगे 90-90 दिनों की अवधि के लिए बढ़ाने का विकल्प भी प्रस्तावित किया गया है।


यूक्रेन के लिए 15 अरब डॉलर की मदद का प्रस्ताव
मीक्स की ओर से एक और संशोधन यूक्रेन से जुड़ा है। इसमें यूक्रेन को 15 अरब डॉलर तक का सीधा कर्ज उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा गया है।
प्रस्ताव के मुताबिक, इस राशि का इस्तेमाल यूक्रेन को रक्षा संबंधी सामान और सेवाओं की खरीद में आर्थिक सहायता देने के लिए किया जा सकता है।
अब आगे क्या होगा?
सीनेट से पारित विधेयक को कानून बनने के लिए प्रतिनिधि सभा से भी मंजूरी मिलनी जरूरी है। इसके बाद ही इसे राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए भेजा जा सकेगा।
फिलहाल प्रतिनिधि सभा में पेश किए गए संशोधनों से यह साफ है कि रूस पर दबाव बढ़ाने के साथ-साथ उसके कारोबारी साझेदार देशों पर संभावित टैरिफ को लेकर भी अमेरिकी सांसदों के बीच मतभेद हैं। भारत का नाम इस बहस में शामिल होने से इस पूरे विधेयक पर नई नजरें टिक गई हैं।