US-Russia Oil Deal: रूस से 3 लाख बैरल डीजल लेकर अमेरिका आ रहा टैंकर, बढ़ती कीमतों के बीच ट्रम्प की नई कोशिश
अमेरिका में डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच रूस से ईंधन की एक बड़ी खेप लेकर टैंकर रवाना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, जहाज करीब 2.98 लाख बैरल डीजल लेकर न्यूयॉर्क पहुंच सकता है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिकी प्रशासन ईंधन की आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों पर काबू पाने के लिए कई कदम उठा रहा है।
एनबीसी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, माल्टा के झंडे वाला टैंकर ‘एगियोई फानेंदेस’ शुक्रवार को रूस के प्रिमोर्स्क बंदरगाह से रवाना हुआ। ऊर्जा बाजार पर नजर रखने वाली कंपनी एनर्जी एस्पेक्ट्स के सूत्रों के मुताबिक, जहाज पर लगभग 2.98 लाख बैरल डीजल लदा है। इसके 10 नवंबर को न्यूयॉर्क पहुंचने की संभावना जताई गई है।
डीजल की कीमतों में करीब 78% की बढ़ोतरी
अमेरिका में डीजल की औसत कीमत 3.55 डॉलर प्रति गैलन से बढ़कर 6.32 डॉलर प्रति गैलन हो गई है। यह करीब 78 प्रतिशत की वृद्धि है। ईरान से जुड़े संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने को कीमतों में बढ़ोतरी की प्रमुख वजहों में गिना जा रहा है।
डीजल महंगा होने का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। खेती-किसानी, ट्रकों से माल ढुलाई और खाद्य पदार्थों की आपूर्ति भी इससे प्रभावित होती है। परिवहन लागत बढ़ने पर कंपनियों का खर्च बढ़ सकता है, जिसका असर वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
रूस पर प्रतिबंधों में ढील देने की कोशिश
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का प्रशासन रूस से ईंधन की आपूर्ति बढ़ाने के लिए कुछ प्रतिबंधों में राहत देने के कदम उठा रहा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब यूक्रेन के खिलाफ रूस का युद्ध जारी है और अमेरिका रूस के साथ अपने संबंधों को लेकर भी प्रयास कर रहा है।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने शुक्रवार को कहा कि रूसी ऊर्जा मंत्रालय ने टैंकर के रवाना होने की जानकारी दी है। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में भी ईंधन की खेप भेजी जा सकती है।
हालांकि, रूस से डीजल की आपूर्ति बढ़ने का असर कितना होगा, यह आने वाली खेपों की संख्या, प्रतिबंधों की स्थिति और वैश्विक बाजार की मांग पर निर्भर करेगा।
अमेरिका की एक दिन की खपत से काफी छोटी खेप
अमेरिका में प्रतिदिन लगभग 38 लाख बैरल डीजल की खपत बताई जाती है। इस लिहाज से रूस से आने वाली 2.98 लाख बैरल की खेप अमेरिकी मांग का छोटा हिस्सा ही पूरा कर सकेगी। यह मात्रा देश की एक दिन की खपत से भी काफी कम है।
एनर्जी एस्पेक्ट्स के विश्लेषकों के मुताबिक, इस खेप से डीजल की कीमतों पर असर सीमित रह सकता है। बैंक ऑफ अमेरिका के कमोडिटी विशेषज्ञ फ्रांसिस्को ब्लांच ने भी रिफाइंड ईंधनों की वैश्विक आपूर्ति में कमी को लेकर चिंता जताई है।
होर्मुज स्ट्रेट के आसपास जहाजों पर हमलों और रूस की तेल रिफाइनरियों पर हमलों को भी आपूर्ति प्रभावित होने की वजहों में शामिल किया गया है। ऐसे हालात में केवल एक खेप से बाजार में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद कम है।
कीमतें घटाने के लिए अमेरिका के दूसरे कदम
डीजल की कीमतों पर दबाव कम करने के लिए ट्रम्प प्रशासन ने कई उपायों की कोशिश की है। इनमें ऑफ-रोड इस्तेमाल वाले डीजल के उपयोग से जुड़े नियमों में राहत और यूरोपीय देशों से अपने डीजल भंडार जारी करने की अपील जैसे कदम शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन ने रणनीतिक ऊर्जा भंडार से अतिरिक्त आपूर्ति उपलब्ध कराने की कोशिश भी की, लेकिन इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने उसकी मांग स्वीकार नहीं की।
क्या जल्द सस्ता होगा डीजल?
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस से आने वाली खेप और सरकारी उपाय कुछ समय के लिए आपूर्ति को सहारा दे सकते हैं, लेकिन डीजल की कीमतों में बड़ी गिरावट की गारंटी नहीं है। इसके लिए वैश्विक स्तर पर ईंधन की उपलब्धता बढ़ना और आपूर्ति से जुड़े जोखिमों का कम होना जरूरी होगा।
फिलहाल, रूस से अमेरिका आ रहा टैंकर ऊर्जा बाजार के लिए एक अहम घटनाक्रम है, लेकिन इसकी सीमित मात्रा को देखते हुए अमेरिकी उपभोक्ताओं को तुरंत बड़ी राहत मिलने की संभावना पर सावधानी से आकलन करना होगा।