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US News: ट्रम्प सरकार की ICC को चेतावनी, नेतन्याहू के खिलाफ वारंट पर बढ़ा विवाद; प्रतिबंधों के बावजूद जांच जारी रखने पर अड़ा कोर्ट

 

अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) के बीच तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सरकार ने अदालत पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ICC को अमेरिका के खिलाफ कार्रवाई बंद करनी चाहिए, अन्यथा अमेरिका उसे खत्म करने की कोशिश करेगा।

इस विवाद की प्रमुख वजह इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू समेत इजराइली अधिकारियों के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट हैं। अमेरिकी सरकार का आरोप है कि अदालत अमेरिकी और इजराइली नागरिकों को अनुचित तरीके से निशाना बना रही है। वहीं, ICC ने अमेरिकी प्रतिबंधों की आलोचना करते हुए स्पष्ट किया है कि इनसे उसकी जांच और कानूनी प्रक्रिया नहीं रुकेगी।

ICC ने कहा- प्रतिबंधों से जांच पर असर नहीं पड़ेगा

अमेरिका की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए ICC की डिप्टी प्रॉसिक्यूटर नजहत शमीम खान ने प्रतिबंधों की निंदा की। उन्होंने कहा कि इस तरह के कदम अंतरराष्ट्रीय कानून और स्वतंत्र न्यायिक संस्थाओं के कामकाज को कमजोर कर सकते हैं।

अदालत की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि प्रतिबंधों के बावजूद वह अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले मामलों की जांच और कानूनी कार्रवाई जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था और देशों की संप्रभुता से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है।

नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट क्यों जारी हुआ?

ICC ने 21 नवंबर 2024 को इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और तत्कालीन रक्षा मंत्री योव गैलेंट के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। यह कार्रवाई गाजा में कथित युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों से जुड़े आरोपों के आधार पर की गई थी।

अदालत ने अपने फैसले में गाजा के नागरिकों को भोजन, पानी और अन्य जरूरी चीजों से वंचित रखने से जुड़े आरोपों का उल्लेख किया था। ICC के अनुसार, इन परिस्थितियों ने आम नागरिकों के लिए गंभीर मानवीय संकट पैदा किया।

इजराइल ने इन आरोपों को खारिज किया और अदालत के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाए। अमेरिका ने भी ICC की कार्रवाई का विरोध किया है। इस तरह मामला केवल इजराइल और फिलिस्तीन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की शक्तियों और उसके फैसलों को लेकर व्यापक विवाद का विषय बन गया है।

नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा के कुछ घंटे बाद कार्रवाई

अमेरिका की ओर से ICC पर प्रतिबंधों की घोषणा ऐसे समय की गई, जब दक्षिण अफ्रीका की पूर्व न्यायाधीश नवी पिल्लै को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने की घोषणा हुई थी। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पिल्लै अंतरराष्ट्रीय न्याय के क्षेत्र में अपने काम के लिए जानी जाती हैं और 2003 से 2008 तक ICC की अपील चैंबर में न्यायाधीश रह चुकी हैं।

हालांकि, रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी प्रशासन की ओर से ICC पर व्यापक प्रतिबंध लगाने की तैयारी नोबेल पुरस्कार की घोषणा से पहले ही चल रही थी। इसलिए दोनों घटनाओं का समय एक जैसा होने के बावजूद, प्रतिबंधों को पुरस्कार की घोषणा से जोड़ना सही नहीं होगा।

अमेरिकी प्रतिबंधों का ICC पर क्या असर होगा?

अमेरिकी प्रतिबंधों का उद्देश्य अदालत की वित्तीय और संस्थागत गतिविधियों को सीमित करना है। रिपोर्टों के मुताबिक, इन उपायों के तहत अमेरिकी वित्तीय सेवाओं और लेन-देन तक ICC की पहुंच प्रभावित हो सकती है। इससे अदालत के साथ काम करने वाली संस्थाओं और अन्य सहयोगियों के सामने भी चुनौतियां आ सकती हैं।

दूसरी ओर, ICC ने सदस्य देशों से अदालत के कामकाज को जारी रखने के लिए सहयोग और संसाधन उपलब्ध कराने की अपील की है। इस विवाद का आगे क्या असर होगा, यह अमेरिकी प्रतिबंधों के क्रियान्वयन और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।

फिलहाल इस विवाद के केंद्र में दो बड़े सवाल हैं: क्या अमेरिकी प्रतिबंध ICC की जांच और कानूनी कार्रवाई को प्रभावित कर पाएंगे, और क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय अदालत की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए एकजुट होकर उसका समर्थन करेगा?