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मिडिल ईस्ट में अमेरिका की सैन्य ताकत बढ़ी, 9 हजार सैनिकों के साथ USS Theodore Roosevelt रवाना; ईरान पर हमले की आशंका

 

अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी सेना करीब 9 हजार अतिरिक्त सैनिकों के साथ एक और एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को क्षेत्र की ओर भेज रही है। इसमें USS Theodore Roosevelt एयरक्राफ्ट कैरियर के साथ USS Makin Island का एम्फीबियस रेडीनेस ग्रुप भी शामिल है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस तैनाती के बाद अक्टूबर के अंत तक क्षेत्र में तीन अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर मौजूद हो सकते हैं।

9 हजार सैनिकों के साथ भेजा गया कैरियर स्ट्राइक ग्रुप

रिपोर्टों के मुताबिक, नई तैनाती में 7 हजार से ज्यादा नाविक और करीब 2 हजार मरीन शामिल हैं। USS Theodore Roosevelt कैरियर स्ट्राइक ग्रुप 27 सितंबर को सैन डिएगो से रवाना हुआ था। इसके साथ Carrier Air Wing 11 और अन्य युद्धपोत भी शामिल हैं। अमेरिकी नौसेना से जुड़ी रिपोर्ट के मुताबिक, यह स्ट्राइक ग्रुप आगे चलकर अमेरिकी सेंट्रल कमांड के क्षेत्र में तैनात किया जा सकता है।

नई तैनाती ऐसे समय हो रही है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अतिरिक्त नौसैनिक और मरीन बलों की मौजूदगी से क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य विकल्प बढ़ेंगे।

पहले से मौजूद हैं दो एयरक्राफ्ट कैरियर

अमेरिकी नौसेना के दो एयरक्राफ्ट कैरियर पहले से मिडिल ईस्ट में मौजूद हैं। इनमें USS George H.W. Bush और USS George Washington शामिल हैं। USS George Washington अगस्त में इस क्षेत्र में पहुंचा था और उसने लंबे समय से तैनात USS Abraham Lincoln की जगह ली थी।

USS Theodore Roosevelt के पहुंचने के बाद तीन अमेरिकी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप एक साथ क्षेत्र में हो सकते हैं। इससे मिडिल ईस्ट में अमेरिकी नौसैनिक मौजूदगी काफी बढ़ जाएगी। रिपोर्टों के मुताबिक, क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिकों और मरीन की कुल संख्या 20 हजार से अधिक हो सकती है।

ट्रंप ने 3 नवंबर के बाद हमले की संभावना जताई

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के खिलाफ दोबारा बड़े सैन्य हमले की संभावना से इनकार नहीं किया है। टाइम मैगजीन को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर बमबारी बढ़ाना संभव है। हालांकि उन्होंने अपनी सैन्य रणनीति से जुड़ी विस्तृत जानकारी देने से इनकार किया।

ट्रंप ने ईरान की ओर से दिए गए हालिया सीजफायर प्रस्ताव को भी स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव में कुछ ऐसे तत्व थे जिन्हें वह पर्याप्त नहीं मानते। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने की पेशकश भी की थी।

पेंटागन के पास सैन्य कार्रवाई के विकल्प तैयार

अमेरिकी सैन्य तैनाती ऐसे समय बढ़ रही है जब वॉशिंगटन ईरान को लेकर आगे की रणनीति पर विचार कर रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, अतिरिक्त एयरक्राफ्ट कैरियर और मरीन यूनिट की तैनाती अमेरिकी कमांडरों को क्षेत्र में ज्यादा सैन्य विकल्प उपलब्ध करा सकती है। हालांकि, अभी यह तय नहीं है कि तीनों कैरियर लंबे समय तक मिडिल ईस्ट में एक साथ रहेंगे या नहीं।

इस नई तैनाती के बाद मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी पर दुनिया की नजरें टिक गई हैं। खासकर 3 नवंबर के अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के बाद ट्रंप प्रशासन ईरान को लेकर क्या फैसला लेता है, यह क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।