US Midterm Elections 2026: ट्रम्प की कुर्सी पर नहीं, संसद में बहुमत पर संकट! महंगाई और ईरान युद्ध से बढ़ी रिपब्लिकन की टेंशन
अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को होने वाले मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के लिए बड़ी राजनीतिक परीक्षा बन सकते हैं। महंगाई, ईरान के साथ युद्ध और राष्ट्रपति की घटती लोकप्रियता जैसे मुद्दों ने पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मौजूदा जनमत सर्वेक्षणों में डेमोक्रेटिक पार्टी को बढ़त मिलने के संकेतों के बीच रिपब्लिकन के सामने कांग्रेस में अपना बहुमत बचाने की चुनौती है।
अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति का चुनाव नहीं होता, बल्कि कांग्रेस के दोनों सदनों—हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट—की सीटों के लिए मतदान होता है। इन चुनावों के नतीजे राष्ट्रपति के बचे हुए कार्यकाल की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। यदि डेमोक्रेट्स एक या दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर लेते हैं, तो ट्रम्प के लिए अपने एजेंडे को आगे बढ़ाना मुश्किल हो सकता है।
1. ट्रम्प की लोकप्रियता में गिरावट, सर्वेक्षणों ने बढ़ाई चिंता
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की अप्रूवल रेटिंग में गिरावट रिपब्लिकन पार्टी के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। अलग-अलग जनमत सर्वेक्षणों में उनके कामकाज को समर्थन देने वाले लोगों का आंकड़ा लगभग 30 से 36 प्रतिशत के बीच बताया गया है।
NBC न्यूज के सर्वेक्षण में 34 प्रतिशत लोगों ने ट्रम्प के कामकाज का समर्थन किया। वहीं, वॉशिंगटन पोस्ट-ABC न्यूज के सर्वे में यह आंकड़ा 33 प्रतिशत और फॉक्स न्यूज के सर्वे में 36 प्रतिशत रहा। प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वेक्षण में उन्हें 30 प्रतिशत समर्थन मिलने का दावा किया गया है।
राष्ट्रपति की लोकप्रियता चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, क्योंकि मतदाता महंगाई, रोजगार, विदेश नीति और सरकार के प्रदर्शन जैसे मुद्दों को ध्यान में रखकर मतदान करते हैं। यदि ट्रम्प की रेटिंग में गिरावट जारी रहती है, तो इसका असर रिपब्लिकन उम्मीदवारों पर भी पड़ सकता है।
2. महंगाई बनी सबसे बड़ी चुनौती, रोजमर्रा की चीजों के दाम से परेशान लोग
2024 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान ट्रम्प ने महंगाई कम करने और आम लोगों के खर्च में राहत देने का वादा किया था। अब बढ़ती कीमतें उनकी सरकार के लिए राजनीतिक चुनौती बन रही हैं।
खाद्य पदार्थों, किराए और ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी से अमेरिकी परिवारों के बजट पर दबाव पड़ रहा है। अंडे, दूध, ब्रेड, मांस और सब्जियों जैसी रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। तेल और गैस की कीमतों में वृद्धि से परिवहन और अन्य खर्च भी बढ़ सकते हैं।
रॉयटर्स-इप्सोस के सर्वेक्षण में 78 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वस्तुओं की कीमतें उनकी कमाई के मुकाबले तेजी से बढ़ रही हैं। वहीं, एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट में 65 प्रतिशत अमेरिकी नागरिकों के ट्रम्प की नीतियों को महंगाई के लिए जिम्मेदार मानने का दावा किया गया है।
ऐसे में रिपब्लिकन पार्टी के लिए मतदाताओं को यह भरोसा दिलाना चुनौती होगी कि सरकार उनकी आर्थिक परेशानियों को दूर करने के लिए प्रभावी कदम उठा रही है।
3. ईरान युद्ध का असर, विदेश नीति पर भी उठ रहे सवाल
ईरान के साथ युद्ध ट्रम्प प्रशासन के लिए एक और चुनौती बन सकता है। विदेश नीति से जुड़े फैसलों और संघर्ष के आर्थिक प्रभावों को लेकर अमेरिकी मतदाताओं के बीच असंतोष की खबरें सामने आई हैं।
युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ने पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। इसका सीधा असर आम लोगों के परिवहन और रोजमर्रा के खर्च पर पड़ सकता है।
NBC न्यूज के सर्वेक्षण में 29 प्रतिशत लोगों ने ईरान युद्ध को संभालने के ट्रम्प के तरीके का समर्थन किया। वहीं, फॉक्स न्यूज के सर्वेक्षण में 64 प्रतिशत लोगों ने उनकी विदेश नीति को गलत बताया। इसके विपरीत, रिपब्लिकन समर्थकों के बीच ट्रम्प को अपेक्षाकृत अधिक समर्थन मिलने की बात सामने आई है।
चुनाव में यह मुद्दा कितना प्रभाव डालेगा, यह मतदाताओं की प्राथमिकताओं और युद्ध की स्थिति पर निर्भर करेगा। अगर विदेश नीति के फैसलों के कारण आर्थिक दबाव बढ़ता है, तो रिपब्लिकन उम्मीदवारों को मतदाताओं के सवालों का सामना करना पड़ सकता है।
4. रिपब्लिकन उम्मीदवार भी ट्रम्प से बना रहे दूरी
ट्रम्प की लोकप्रियता में गिरावट का असर उनकी पार्टी के उम्मीदवारों की रणनीति पर भी पड़ सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ रिपब्लिकन उम्मीदवार विवादित नीतियों से दूरी बनाकर अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
इन उम्मीदवारों के सामने दोहरी चुनौती है। अगर वे ट्रम्प के साथ मजबूती से खड़े रहते हैं, तो उनकी लोकप्रियता में गिरावट का असर उनके चुनावी प्रदर्शन पर पड़ सकता है। वहीं, यदि वे राष्ट्रपति से ज्यादा दूरी बनाते हैं, तो पार्टी के कट्टर समर्थकों की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है।
इसलिए कई उम्मीदवार स्थानीय मुद्दों, अर्थव्यवस्था और अपने चुनाव क्षेत्र की जरूरतों पर अधिक जोर दे सकते हैं। मिडटर्म चुनाव में यह रणनीति कितनी कारगर साबित होगी, इसका फैसला मतदाता करेंगे।
कांग्रेस में बहुमत खोने पर ट्रम्प के सामने क्या मुश्किलें आएंगी?
अगर डेमोक्रेटिक पार्टी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स या सीनेट में बहुमत हासिल कर लेती है, तो ट्रम्प प्रशासन की नीतियों को आगे बढ़ाना कठिन हो सकता है।
- नए कानून: कांग्रेस में डेमोक्रेट्स का बहुमत होने पर ट्रम्प के विधायी प्रस्तावों को मंजूरी दिलाना मुश्किल हो सकता है।
- बजट और सरकारी खर्च: बजट से जुड़े फैसलों पर दोनों पार्टियों के बीच टकराव बढ़ सकता है।
- सरकारी कामकाज की जांच: डेमोक्रेट्स राष्ट्रपति प्रशासन के फैसलों और कामकाज की निगरानी बढ़ा सकते हैं।
- राजनीतिक दबाव: बहुमत खोने से ट्रम्प को अपने एजेंडे पर आगे बढ़ने के लिए विपक्ष के साथ समझौते करने पड़ सकते हैं।
हालांकि, रिपब्लिकन पार्टी के पास भी चुनाव प्रचार के लिए संसाधन और अपने समर्थकों का मजबूत आधार है। इसके अलावा, उम्मीदवारों की स्थानीय लोकप्रियता और चुनावी क्षेत्रों के समीकरण भी परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं।
3 नवंबर के चुनाव क्यों हैं अहम?
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव केवल कांग्रेस की सीटों का मुकाबला नहीं हैं, बल्कि इन्हें राष्ट्रपति के कामकाज पर जनता की प्रतिक्रिया के तौर पर भी देखा जाता है। ट्रम्प के सामने महंगाई पर राहत देने, विदेश नीति को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देने और अपनी पार्टी के उम्मीदवारों को जीत दिलाने की चुनौती है।
यदि रिपब्लिकन पार्टी बहुमत बचाने में सफल रहती है, तो ट्रम्प को अपने एजेंडे पर आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है। लेकिन अगर डेमोक्रेट्स कांग्रेस में मजबूत स्थिति हासिल कर लेते हैं, तो राष्ट्रपति के शेष कार्यकाल में राजनीतिक टकराव बढ़ने की संभावना होगी।