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ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच अमेरिका बढ़ा रहा सैन्य दबाव, फुटेज में देखें USS अब्राहम लिंकन मिडिल ईस्ट की ओर रवाना

 

ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों और बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच अमेरिका अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत करने की तैयारी में जुट गया है। इसी क्रम में अमेरिकी नौसेना का शक्तिशाली एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप USS अब्राहम लिंकन साउथ चाइना सी से मिडिल ईस्ट की ओर रवाना हो गया है। इस घटनाक्रम को पश्चिम एशिया में संभावित बड़े टकराव की आशंका से जोड़कर देखा जा रहा है।

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USS अब्राहम लिंकन अमेरिकी नौसेना का एक न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर है, जिसे दुनिया के सबसे बड़े और सबसे ताकतवर युद्धपोतों में गिना जाता है। इस कैरियर स्ट्राइक ग्रुप में आधुनिक फाइटर जेट, मिसाइल डेस्ट्रॉयर, क्रूज़र और सबमरीन शामिल होती हैं, जो किसी भी सैन्य अभियान को अंजाम देने में सक्षम हैं। इसकी तैनाती से साफ संकेत मिलता है कि अमेरिका मिडिल ईस्ट की स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है।

अमेरिकी न्यूज वेबसाइट ‘न्यूज नेशन’ की रिपोर्ट के अनुसार, USS अब्राहम लिंकन को रवाना करने का फैसला ईरान द्वारा अपने एयरस्पेस को बंद किए जाने के ठीक एक घंटे बाद लिया गया। इस समय-सीमा को काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह अमेरिका की त्वरित प्रतिक्रिया को दर्शाता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि यह स्ट्राइक ग्रुप पहले साउथ चाइना सी में तैनात था, जहां इसका मुख्य उद्देश्य चीन की गतिविधियों पर नजर रखना था। हालांकि, अब इसकी अचानक मूवमेंट ने अंतरराष्ट्रीय हलकों में हलचल बढ़ा दी है।

सूत्रों के मुताबिक, USS अब्राहम लिंकन स्ट्राइक ग्रुप को मिडिल ईस्ट पहुंचने में करीब एक हफ्ते का समय लग सकता है। हालांकि, अभी तक अमेरिकी रक्षा विभाग या व्हाइट हाउस की ओर से इस तैनाती को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसके बावजूद सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम ईरान को कड़ा संदेश देने और क्षेत्र में अमेरिकी हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

ईरान में इन दिनों सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज हैं। महंगाई, बेरोजगारी और राजनीतिक असंतोष को लेकर बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि हालात बिगड़ने की स्थिति में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव और बढ़ सकता है। अमेरिका पहले भी इस तरह की परिस्थितियों में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाकर दबाव की रणनीति अपना चुका है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका ने इससे पहले वेनेजुएला में संभावित हमलों से पहले भी इसी तरह सैन्य तैनाती बढ़ाई थी। ऐसे उदाहरणों को देखते हुए USS अब्राहम लिंकन की तैनाती को केवल रूटीन मूवमेंट नहीं माना जा रहा। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि अमेरिका और ईरान के बीच यह बढ़ता तनाव किस दिशा में जाता है और क्या मिडिल ईस्ट एक बार फिर बड़े संघर्ष के मुहाने पर खड़ा होता है।