US-Iran Tension: ईरान पर फिर हमले की तैयारी में अमेरिका? ट्रंप की सिक्योरिटी टीम के साथ बैठक, युद्ध बढ़ने पर इकोनॉमी को हो सकता है बड़ा नुकसान
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू करने को लेकर चर्चा होने की खबरें सामने आई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने अपनी नेशनल सिक्योरिटी टीम के साथ बैठक की, जिसमें ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य अभियान को फिर से शुरू करने के विकल्पों पर विचार किया गया।
फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर आगे की रणनीति तैयार की जा रही है। हालांकि, अभी तक सैन्य अभियान दोबारा शुरू करने का कोई आधिकारिक आदेश जारी होने की पुष्टि नहीं हुई है।इस बीच मिडिल ईस्ट मामलों के जानकार कमर आगा ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका एक बार फिर ईरान के साथ युद्ध में उतरता है, तो इसका असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था, महंगाई और आम लोगों के घरेलू बजट पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।
ट्रंप की नेशनल सिक्योरिटी टीम की बैठक में क्या हुआ?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान दोबारा शुरू करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।अमेरिकी अधिकारी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर आगे की कार्रवाई के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, सैन्य कार्रवाई को लेकर अंतिम फैसला अभी सामने नहीं आया है।ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान ईरान को लेकर सख्त बयान भी दिया। उन्होंने संकेत दिया कि हालात के मुताबिक अमेरिका को कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं। उनके इस रुख के बाद क्षेत्र में सैन्य तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
क्या ईरान के परमाणु ठिकानों पर फिर हमला करेगा अमेरिका?
अमेरिका और ईरान के बीच विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। अमेरिका लंबे समय से ईरान की परमाणु गतिविधियों को लेकर चिंता जताता रहा है। वॉशिंगटन का आरोप है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है, जबकि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण उद्देश्यों से जुड़ा बताता रहा है।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारी ईरान के परमाणु ठिकानों के खिलाफ संभावित सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। इससे पहले भी अमेरिका ने ईरान के फोर्डो जैसे महत्वपूर्ण परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया था।
मिडिल ईस्ट मामलों के जानकार कमर आगा का कहना है कि ईरान के परमाणु ठिकानों पर पहले भी हमले किए जा चुके हैं, लेकिन इससे समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकला। उनके मुताबिक, ईरान के कुछ महत्वपूर्ण परमाणु केंद्र पहाड़ी इलाकों के भीतर काफी गहराई में बने हैं, जिन्हें पूरी तरह नष्ट करना आसान नहीं है।ऐसे में अगर अमेरिका दोबारा हमला करता है, तो यह देखना अहम होगा कि सैन्य कार्रवाई से वास्तव में कितना असर पड़ता है और क्या इससे क्षेत्र में संघर्ष और लंबा खिंच सकता है।
ईरान से युद्ध अमेरिका की अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित कर सकता है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, ईरान के साथ नया युद्ध शुरू करना अमेरिका के लिए आर्थिक रूप से भी महंगा साबित हो सकता है। अमेरिका में पहले से ही महंगाई और रोजमर्रा की जरूरतों की बढ़ती कीमतों को लेकर लोगों की चिंता बनी हुई है।कमर आगा का कहना है कि अमेरिकी परिवारों पर जीवनयापन की लागत का दबाव है। ऐसे समय में नया युद्ध शुरू होने से ऊर्जा की कीमतें बढ़ सकती हैं और आम लोगों के खर्च पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
युद्ध की स्थिति में अमेरिका को सैन्य अभियान, हथियारों, सैनिकों की तैनाती और रक्षा व्यवस्था पर भारी खर्च करना पड़ सकता है। इसके अलावा, अगर पश्चिम एशिया में तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की कीमतों में तेजी आ सकती है।अमेरिकी अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता खर्च की बड़ी भूमिका है। ऐसे में अगर महंगाई बढ़ने से लोग खरीदारी और दूसरे खर्चों में कटौती करते हैं, तो इसका असर आर्थिक विकास पर भी पड़ सकता है।
अमेरिका हमला करता है तो ईरान कैसे दे सकता है जवाब?
अगर अमेरिका ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई करता है, तो जवाबी हमले की आशंका भी बनी रहेगी। ईरान पहले भी संकेत देता रहा है कि उसके खिलाफ किसी बड़े हमले की स्थिति में वह क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सहयोगी देशों के हितों को निशाना बना सकता है।विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए जवाब देने की कोशिश कर सकता है। खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने और इजरायल भी इस संघर्ष के दायरे में आ सकते हैं।
कमर आगा का मानना है कि युद्ध दोबारा शुरू होने पर ईरान की जवाबी कार्रवाई काफी गंभीर हो सकती है। इससे पश्चिम एशिया में पहले से मौजूद तनाव और बढ़ने की आशंका है।हालांकि, किसी संभावित हमले का वास्तविक दायरा और उसका परिणाम पहले से तय नहीं किया जा सकता। यह काफी हद तक दोनों देशों की सैन्य रणनीति और संघर्ष के दौरान लिए जाने वाले फैसलों पर निर्भर करेगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा तनाव, तेल सप्लाई को लेकर चिंता
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी पड़ सकता है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है।अगर यहां सैन्य तनाव बढ़ता है या जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसका असर पेट्रोल-डीजल, परिवहन और कई दूसरी वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।इसी वजह से ईरान और अमेरिका के बीच किसी भी नए सैन्य टकराव पर दुनिया की नजर बनी हुई है।
क्या ट्रंप के लिए नया युद्ध बन सकता है आर्थिक और राजनीतिक चुनौती?
अमेरिका में महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत पहले से ही राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा रही है। ऐसे माहौल में ईरान के साथ नया युद्ध शुरू करना ट्रंप प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।एक तरफ सैन्य कार्रवाई से अमेरिका को पश्चिम एशिया में अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करने का मौका मिल सकता है, वहीं दूसरी तरफ युद्ध का खर्च, तेल की कीमतों में उछाल और घरेलू महंगाई सरकार के लिए मुश्किलें बढ़ा सकते हैं।
फिलहाल अमेरिकी प्रशासन की ओर से ईरान के खिलाफ नए सैन्य अभियान की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में ट्रंप प्रशासन का अगला कदम बेहद अहम होगा। अगर बातचीत और कूटनीति के रास्ते तनाव कम नहीं हुआ, तो पश्चिम एशिया में एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की आशंका बढ़ सकती है।