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US-Iran Peace Deal: ईरान ने किया बड़ा यू-टर्न, खामेनेई की सहमति के बाद इस हफ्ते ट्रंप के साथ जो सकता है शांति समझौता 

 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के सर्वोच्च नेता ने शांति समझौते को मंज़ूरी दे दी है। ट्रंप के अनुसार, इस समझौते पर इस हफ़्ते के अंत तक किसी यूरोपीय देश में हस्ताक्षर हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस मौजूद रहेंगे। हालाँकि, ईरान का प्रतिनिधित्व कौन करेगा, इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। माना जा रहा है कि कुछ पश्चिमी एशियाई देशों के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल हो सकते हैं।

पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि समझौते के लगभग सभी मुख्य बिंदुओं पर सहमति बन गई है। उनके अनुसार, सऊदी अरब, इज़राइल, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, तुर्की, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, मिस्र और कई अन्य देशों ने इस समझौते का समर्थन किया है। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक समझौता अंतिम रूप नहीं ले लेता, तब तक होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में नौसैनिक नाकाबंदी जारी रहेगी।

**संघर्ष की शुरुआत कैसे हुई**

ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच तनाव 28 फरवरी, 2026 को शुरू हुआ। यह संघर्ष लंबा खिंचा; लगभग 40 दिनों के बाद एक अस्थायी युद्धविराम की घोषणा की गई, लेकिन हमलों का एक नया दौर शुरू हो गया। अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमले किए और ईरान ने जवाबी कार्रवाई की। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करता है, तो खार्ग द्वीप पर कब्ज़ा करने के लिए कार्रवाई की जा सकती है।

**अमेरिका और इज़राइल द्वारा रखी गई मुख्य शर्तें**

अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के सामने कई मुख्य शर्तें रखीं। पहली शर्त यह थी कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से खत्म कर दे। दूसरी शर्त के तहत ईरान को अपना संवर्धित यूरेनियम (enriched uranium) सौंपना था। तीसरी शर्त में ईरान से अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को रोकने की मांग की गई। चौथी शर्त यह थी कि ईरान हिज़्बुल्लाह, हूथी और हमास जैसे संगठनों को वित्तीय और अन्य सहायता देना बंद करे। इसके अलावा, संघर्ष की शुरुआत में ईरान में सत्ता परिवर्तन (regime change) लाने की कोशिशों की भी बात हुई थी।

**ईरान की मुख्य मांगें**

ईरान ने भी अमेरिका और इज़राइल के सामने अपनी शर्तें रखीं। ईरान चाहता था कि अमेरिका और पश्चिमी देश उस पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध हटा लें। उसने विदेशों में फ्रीज़ की गई अपनी संपत्ति और फंड को जारी करने की भी मांग की। इसके अलावा, ईरान ने ज़ोर दिया कि इज़राइल लेबनान पर हमले बंद करे और अमेरिका तथा इज़राइल दोनों ईरान पर भविष्य में होने वाले हमलों के खिलाफ गारंटी दें। ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल नागरिक उद्देश्यों के लिए है। साथ ही, उसने अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को रोकने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है।

**अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?**

अभी सबसे अहम सवाल यह है कि ट्रंप के तैयार किए गए शांति समझौते के प्रस्ताव में दोनों पक्षों की मांगों को किस हद तक शामिल किया गया है। यह देखना बाकी है कि क्या ईरान सच में इस समझौते पर दस्तखत करेगा और क्या इज़राइल लंबे समय से चले आ रहे विवाद को खत्म करने के लिए तैयार है। इसके साथ ही, यह सवाल भी है कि क्या अमेरिका सच में पश्चिम एशिया में स्थायी शांति कायम कर पाएगा।

**वीकेंड पर सबकी नज़रें**

ट्रंप के दावों की असल तस्वीर तब सामने आएगी जब इस वीकेंड प्रस्तावित शांति समझौते पर दस्तखत की प्रक्रिया शुरू होगी। जिस यूरोपीय देश में समझौते पर दस्तखत होंगे, वह भी अहम होगा। खबरों के मुताबिक, 15 से 17 जून तक फ्रांस में G-7 समिट होनी है, जिसमें राष्ट्रपति ट्रंप के शामिल होने की उम्मीद है। एक खास बैठक के लिए मध्य-पूर्व के कई देशों को भी न्योता दिया गया है। इसलिए, आने वाले दिनों की घटनाओं पर सबकी नज़रें टिकी होंगी।