अमेरिकी सरकार ने ट्रंप के इमरजेंसी टैरिफ की वसूली बंद की, वीडियो में देखें ट्रम्प ने देशों को दी चेतावनी
अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के समय में लागू किए गए इमरजेंसी टैरिफ (Emergency Tariffs) को लेकर बड़ी घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी सरकार ने ऐलान किया है कि आज से इन टैरिफ की वसूली पूरी तरह बंद कर दी जाएगी। इसका मतलब यह है कि अब उन देशों से पुराने टैरिफ के रूप में लिए गए शुल्क वापस नहीं लिए जाएंगे। यह फैसला उस समय आया है जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने तीन दिन पहले कहा था कि ट्रम्प प्रशासन द्वारा लगाए गए ये टैरिफ गैरकानूनी (illegal) थे।
टैरिफ विवाद की पृष्ठभूमि यह है कि पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प ने अमेरिका की घरेलू उद्योगों और व्यापारिक हितों की सुरक्षा के नाम पर वैश्विक स्तर पर कई इमरजेंसी टैरिफ लगाए थे। इनमें मुख्य रूप से स्टील और एल्युमिनियम जैसे औद्योगिक उत्पादों पर भारी शुल्क शामिल थे। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में यह निर्णय दिया कि ट्रम्प प्रशासन ने IEEPA (International Emergency Economic Powers Act) का गलत इस्तेमाल किया, क्योंकि इस अधिनियम का उद्देश्य आपातकालीन आर्थिक नियंत्रण था, न कि देशों पर टैरिफ लगाने का। कोर्ट के फैसले ने ट्रम्प के टैरिफ को गैरकानूनी घोषित कर दिया।
इस फैसले के तुरंत बाद ट्रम्प ने स्पष्ट संदेश देते हुए उन देशों को चेतावनी दी है जो अमेरिका के साथ ट्रेड डील में धोखाधड़ी या ‘गेम’ खेलने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि किसी देश ने अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौते का उल्लंघन किया, तो न केवल उन पर और ऊंचे टैरिफ लगाए जाएंगे, बल्कि उनका व्यापार अमेरिका के साथ और भी कठिन परिस्थितियों में रहेगा। ट्रम्प के इस बयान से वैश्विक व्यापार जगत में हलचल मच गई है और कई देशों ने अमेरिकी टैरिफ नीतियों की समीक्षा शुरू कर दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप की यह रणनीति मुख्य रूप से अमेरिकी उद्योगों की सुरक्षा और विदेशी व्यापारियों को अमेरिकी नियमों के प्रति जिम्मेदार बनाने के उद्देश्य से अपनाई गई थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, सरकार अब टैरिफ वसूली नहीं करेगी, जिससे भारत, चीन और अन्य देशों पर आर्थिक दबाव के नए आयाम सामने आएंगे। इससे अमेरिकी व्यापार नीति में बदलाव और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता की संभावना बढ़ गई है।
अमेरिका के आर्थिक विशेषज्ञ भी मानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला और ट्रम्प की चेतावनी एक तरह से व्यापार नीति में असमानता और अनिश्चितता दोनों पैदा कर रही है। विशेष रूप से भारत और चीन जैसे बड़े व्यापारिक देशों के लिए यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनके साथ अमेरिका की ट्रेड डील प्रभावित हो सकती है।
इस घटना ने वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंचों पर भी ध्यान खींचा है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका की यह नीति आने वाले समय में वैश्विक व्यापार संघर्ष को और बढ़ा सकती है और देशों को अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौते के दौरान सतर्क रहने के लिए मजबूर कर सकती है।
अमेरिकी सरकार द्वारा टैरिफ की वसूली बंद करना और ट्रम्प का नया रुख स्पष्ट संकेत देता है कि अमेरिका वैश्विक व्यापार में अपने हितों की सुरक्षा के लिए किसी भी कदम से पीछे नहीं हटेगा। साथ ही, यह कदम यह भी दिखाता है कि ट्रम्प प्रशासन द्वारा शुरू किए गए टैरिफ विवाद अब पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय व्यापार चर्चा का हिस्सा बन गए हैं।